सुप्रीम कोर्ट ने वक़्फ़ संशोधन अधिनियम की 3 धाराओं पर लगाई रोक: सूफिज़्म का मरकज़ बरेली ने किया इसका स्वागत

सुप्रीम कोर्ट ने वक़्फ़ संशोधन अधिनियम की 3 धाराओं पर लगाई रोक: सूफिज़्म का मरकज़ बरेली ने किया इसका स्वागत
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता)
बरेली : सुप्रीम कोर्ट ने वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2024 की तीन विवादित धाराओं पर आंशिक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा की तरफ से इस मामले में पैरवी करते हुए चार सदस्यीय एडवोकेट पैनल में मौजूद एडवोकेट रिज़वान मर्चेंट, एडवोकेट मुहम्मद ताहा, एडवोकेट सुबैल फ़ारूक़, एडवोकेट रंजन कुमार दुबे ने कड़ी कानूनी दलीले पेश की जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम अंतरिम आदेश जारी किया। इनमें सबसे अहम धारा वह थी, जिसमें वक़्फ़ मामलों में मान्यता के लिए पांच साल मुस्लिम होने की शर्त को अनिवार्य बनाया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह शर्त संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करती है। साथ ही, वक़्फ़ क़ानून के सेक्शन 3 और 4 पर, वक़्फ़ एक्ट के अनुच्छेद 374 पर, वक़्फ़ संपत्तियों के पंजीकरण पर नए प्रतिबंध और सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने वाले प्रावधानों पर भी रोक लगा दी गई। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर भूमि विवाद का निपटारा नहीं कर सकते, क़्फ़ बोर्ड का CEO मुस्लिम ही हो जैसे फैसले दिए |
बरेली मरकज़* ने इस फैसले का स्वागत किया है उलेमा किराम ने कहा कि यह फैसला मुसलमानों के मज़हबी हुक़ूक़ और वक़्फ़ संस्थाओं की ख़ुद मुख्तारी की जीत है। उलेमा किराम ने कहा कि वक़्फ़ सम्पत्तियों का संरक्षण, धार्मिक आज़ादी और संविधानिक अधिकार किसी भी कीमत पर समझौते के क़ाबिल नहीं हैं।
जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष सलमान हसन खान (सलमान मिया)* ने भी इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मुसलमानों की मज़हबी आज़ादी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक क़दम बताया। उन्होंने कहा कि वक़्फ़ संस्थाओं की स्वायत्तता और धार्मिक आज़ादी किसी भी हाल में समझौते के क़ाबिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा ने वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2024 की कई धाराओं को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।उन्होंने कहा कि यह अधिनियम न केवल नए मुसलमानों और इस्लाम अपनाने वालों के साथ भेदभाव करता है, बल्कि भारत की धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता की मूल भावना को भी ठेस पहुँचाता है। उन्होंने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई आने वाले हफ्तों में होगी। मरकज़ मरकज़ी तंज़ीम जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा ने भरोसा जताया है कि यह कानूनी लड़ाई समुदाय के अधिकारों की मज़बूती के साथ जारी रहेगी।




