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अध्यात्म के बिना व्यक्ति वैसे ही अपूर्ण है जैसे अग्नि के बिना दीपक-स्वामी धीरानंद जी

(पंजाब) फिरोजपुर 20 नवंबर [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा कारागार सुधार परियोजना एवं पुनर्वास कार्यक्रम अंतरक्रांति के अंतर्गत स्थानीय केंद्रीय सुधारगृह श्रीगंगानगर में दो दिवसीय आध्यात्मिक चिंतन एवं ध्यान आयोजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसकेदूसरे दिवस संस्थान की ओर से दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी धीरानंद जी ने कैदी बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अध्यात्म भारत देश की पहचान, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना का अभिन्न अंग है, जो वैदिक काल से लेकर आज तक ज्ञान, योग, भक्ति, आयुर्वेद, और दार्शनिक परंपराओं में निहित है। यह न केवल आत्म-साक्षात्कार का मार्ग है, बल्कि शांति, सद्भाव और सार्वभौमिक एकता 'वसुधैव कुटुम्बकम' के वैश्विक संदेश का केंद्र भी है, जो इसे एक व्यावहारिक और हर पहलू में लागू करने योग्य जीवनशैली बनाता है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद और उपनिषद आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग का आधार हैं।
भारत में दर्शन और धर्म का गहरा संबंध है। भारत का आध्यात्मिक संदेश, “संपूर्ण विश्व एक परिवार है”, दुनिया को शांति और सद्भाव की ओर ले जाने की क्षमता रखता है भोगवाद और संघर्ष से जूझ रहे वर्तमान समाज में अध्यात्म ही सभी समस्याओं का सटीक समाधान है।
स्वामी जी ने बताया कि बिना गुरु की ईश्वर प्राप्ति असंभव है इसलिए सर्वप्रथम हमें एक पूर्ण गुरु की खोज करनी चाहिए, बिना गुरु के वेदों के सार को समझ पाना और अध्यात्म का ज्ञान दोनों ही असंभव हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित कारागार अधीक्षक महावीर मीणा और महेश शर्मा जी ने संस्थान के प्रकल्प अन्तरक्रान्ति की सराहना की।
इस अवसर पर साध्वी सोनिया भारती जी ने सुमधुर भजनों का गायन किया।




