मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना बना वरदानः वनांचल के 17 ग्रामों में चिमनी युग का अंत
बिजली ने बदली 540 परिवारों के जीवन की दशा और दिशा, बच्चों को मिला ज्ञान बढ़ाने का जरिया

मोहला, 05 जनवरी 2026 / आजादी के 75 साल बाद पहली बार बिजली पहुंचने का उत्साह ग्राम संबलपुर में ऐसा नजर आया कि मानो कोई त्यौहार मनाया जा रहा हो। गांव के बच्चों, बड़ों एवं बूजुर्गों के आंखो एवं उनके चेहरे का रंग ही सब कुछ बयां कर रही थी। बिजली आने की खुशी वहां के लोगों का कई दशकों पुराने सपनों का साकार होने जैसा था। इस गांव में निवासरत 45 परिवारों का जीवन पारंपरिक बिजली की रोशनी से वंचित था। एक तरह से यहां के ग्रामीण लालटेन व चिमनी के सहारे अपने जीवन के कई साल गुजार चुके थे। घने वनों एवं पहाड़ो के बीच बसे हुए इन ग्रामों के रहवासियों की वर्षों से शासन एवं प्रशासन ओर टकटकी लगाकर बस एक ही मांग रही कि कैसे भी हमें एवं हमारे घरों को बिजली की जगमगाहट से रोशन कर दें। और फिर छ0ग0 शासन एवं जिला प्रशासन ने उनकी मांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता से पूरा करते हुए उनके सपनों को सच करके दिखाया है।
मुख्यमंत्री मजरा टोला विद्युतीकरण योजना बना वरदान:-
नया सवेरा और वरदान के रूप में मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना ने इस गांव के साथ-साथ 16 गांवो के 540 परिवारों की जिन्दगी बदल दी। हम बात कर हैं, नये जिलें मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी के अत्यंत सघन वनों से घिरे वनग्रामों कातुलझोरा, कट्टापार, बोदरा, बुकमरका, संबलपुर, मुंदेली, गट्टेगहन, पुगदा, आमापायली, पीटेमेटा, टाटेकसा, कुंडकाल, रायमन्होरा, नैनगुड़ा, मेटातोडके, घोटियाकन्हार, एडसमेटा एवं कुंजकन्हार की, जहां देश के आजादी के 75 सालों तक बिजली नहीं पहुंच पाई थी। जिला प्रशासन, वन विभाग एवं बिजली विभाग की निरंतर प्रयासों के कारण मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के तहत 06 करोड़ 80 लाख रूपये की राशि स्वीकृत कर विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया गया है। इन ग्रामों के विद्युतीकरण के लिए कुल 89 कि.मी. 11 के.व्ही.लाईन, 22 कि0मी0 निम्नदाब लाइन, 95 नग विद्युत पोल एवं 25 नग वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इन ग्रामों में निवासरत 540 परिवारों का जीवन पारंपरिक बिजली की रोशनी से वंचित था। एक तरह से यहां के ग्रामीण लालटेन व चिमनी के सहारे अपनी दिनचर्या व्यतीत कर रहे थे। इन ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए कुशल विद्युत कर्मियों द्वारा पूर्ण किया गया। अत्यंत सघन वनों से घिरे वनग्रामों के लोगो ने पहली बार अपने गांव में पांरपरिक बिजली की रोशनी देखी। विद्युतीकरण का कार्य पूरा होने के बाद ग्रामीणों ने खुशी में हर्षाेल्लास के साथ पटाखे फोड़े।
बिजली से रोशन हुए ग्राम संबलपुर में तीसरी कक्षा के छात्र तमेश्वर की अफसर बनने की चाह:-
बिजली से जगमग हुए आदिवासी बाहुल्य ग्राम संबलपुर के तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र तमेश्वर को सपना सच होने जैसी अनुभूति हुई। उन्होने बताया कि जब गांव में पहली बार बिजली पहुंची तब गांव के सभी बच्चे रोमाचिंत होकर झूमने लगे, सभी को लगने लगा कि अब हम देर रात तक पढ़ाई कर सकेंगें। और लक्ष्य बनाकर किसी दिन बड़े अधिकारी बनने का सपना भी पूरा करेंगें। गांव में बिजली पहुंचने के कारण देष-दुनिया से जुड़ने के साथ मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक जानकारियां अब मिलने लगी है। ग्राम के ही श्री मेहरूराम हिड़ामी ने बताया कि दूसरे गांवो में रहने वाले रिश्तेदारों जिनके के घर बिजली से रोशन थे, उनके यहां जाने से मन में हमेशा एक पीड़ा होती थी कि कब हमारा गांव भी बिजली से रोशन होगा और हम भी आधुनिक संसाधनों का लाभ उठा पायेंगे। जिस दिन हमारे गांव में बिजली पहुंची उस दिन पूरे गांव में दिवाली त्यौहार के जैसा उत्सव मनाया गया, फटाखे जलाये गए और मिठाईयां बांटी गई। कई दशकों पुराना सपना साकार हुआ है। इस कार्य के लिए संबलपुर सहित 16 गांवों के 540 परिवारों ने माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के साथ-साथ जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, वन विभाग एवं विद्युत विभाग का आभार जताते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।




