विधानमंडलों की जनता के प्रति सर्वोच्च जवाबदेही : विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण

हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को किया संबोधित।
लखनऊ, (प्रमोद कौशिक) 20 जनवरी- 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में मंगलवार को हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने “जनता के प्रति विधानमंडलों की जवाबदेही” विषय पर संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि विधानमंडल जनता की भावनाओं, आशाओं और आकांक्षाओं को उनके प्रतिनिधियों के माध्यम से सदन में अभिव्यक्त करने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विधानमंडलों का मूल दायित्व जनता के हित में कार्य करना और उनके प्रति उत्तरदायी बने रहना है। विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा सत्य यह है कि सत्ता का स्रोत जनता है और उसकी दिशा संविधान तय करता है। भारत का संविधान न केवल शासन की व्यवस्था करता है, बल्कि विधानमंडलों को जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह रहने का स्पष्ट निर्देश भी देता है। उन्होंने कहा कि विधानमंडलों की भूमिका केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण, विवादों का समाधान, विकास की दिशा तय करना, सामाजिक सुधार और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनके प्रमुख दायित्वों में शामिल है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जवाबदेही को केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक जवाबदेही विधानमंडल के चरित्र, कार्य-संस्कृति और संस्थागत क्षमता का संयुक्त प्रतिबिंब होती है। प्रश्नकाल, शून्यकाल, समितियां और वित्तीय नियंत्रण जैसे संसदीय उपकरण तभी प्रभावी होते हैं, जब उनके पीछे संवैधानिक दृष्टि, जनता के प्रति संवेदनशीलता और सशक्त संस्थागत ढांचा हो। हरियाणा विधान सभा द्वारा पिछले एक वर्ष में उठाए गए ठोस कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लोक सभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में विधानमंडल को अधिक जवाबदेह, सक्षम और सहभागी बनाने के लिए अनेक पहल की गई हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण योजना लागू की गई, लोकसभा के सहयोग से विधायी ड्राफ्टिंग कार्यशालाओं का आयोजन किया गया तथा विधायकों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में पटना में आयोजित 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के प्रस्तावों को साकार करने के लिए भी कई पहल की गईं। लोकसभा के सहयोग से हरियाणा के गुरुग्राम में राष्ट्रीय शहरी स्थानीय निकायों की कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें देशभर के महापौरों और अध्यक्षों ने भाग लिया। हरियाणा विधान सभा में लेजिस्लेटिव रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर का गठन किया गया। युवाओं को विधायी प्रक्रिया से जोड़ने के लिए तीन युवा संसद जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा विधान सभा की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त युवा मामलों और पर्यावरण से संबंधित दो नई समितियों का गठन किया गया। विस अध्यक्ष ने कहा कि इन सभी प्रयासों के माध्यम से हरियाणा विधानसभा “एक राष्ट्र, एक विधायिका” की भावना के अनुरूप पारदर्शी और सहभागी विधायी प्रणाली के निर्माण की दिशा में निरंतर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सशक्त विधायिका,जागरूक समाज और मजबूत संस्थागत क्षमता के बिना विकसित भारत- 2047 का संकल्प पूरा नहीं हो सकता। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने डॉ.भीमराव अम्बेडकर के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि सदन की नैतिक शक्ति और जनमत की स्वीकृति ही प्रशासन की शुचिता सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा आधार है।




