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श्रद्धापूर्वक महाशिवरात्रि का व्रत व पूजा करने से भगवान शिव की कृपा से सुख- समृद्धि मिलती है

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
संवाददाता – उमेश गर्ग।

कुरुक्षेत्र ; श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र) के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि को भगवान शिव के जन्म महोत्सव का दिन बताया गया है,मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस दिन विशेष पारद शिवलिंग की विशेष पूजा भी की जाती है। भगवान शिव और माँ पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था I
सर्वार्थ सिद्ध योग के साथ महाशिवरात्रि का महत्व :
ज्योतिष और वैदिक ग्रंथों के अनुसार 300 साल बाद महाशिवरात्रि आठ शुभ संयोग वाली है।
इस बार महाशिवरात्रि का पर्व विशेष इसलिए भी है क्योंकि इस दिन सूर्य बुध और शुक्र त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसको बड़ा ही दुर्लभ संयोग माना जाता है 300 साल बाद महाशिवरात्रि इस बार आठ शुभ संयोग लेकर आ रही है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन शिव जी का शिवलिंग के रूप में प्राकट्य हुआ था, बारह ज्‍योर्तिलिंग का प्राकट्य उत्‍सव महोत्सव का दिन है महाशिवरात्रि। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि व्रत, पूजा, कथा और उपायों का विशेष महत्व होता है। इस बार महाशिवरात्रि सर्वार्थ सिद्ध योग के साथ रविवार 15 फरवरी 2026 को श्रवण नक्षत्र और मकर राशि के चन्द्रमा में मनाई जाएगी।
आध्यात्मिक महत्त्व क्या है ? :
समर्थगुरु धाम,मुरथल के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी बताते है कि प्रथम धर्म चक्र का प्रवर्तन आज से 10000 साल पहले भगवान शिव ने किया I सनातन धर्म के मुख्य प्रवर्तक भगवान शिव है I सनातन धर्म मानता है कि भगवान शिव आदि गुरु है ,आदियोगी है उन्होंने सनातन धर्म का चक्र का प्रवर्तन किया I इसके 2500 साल बाद भगवान राम आए I दूसरे धर्म चक्र का प्रवर्तन भगवान राम ने किया ,यह भी 2500 साल तक चला I इसके बाद भगवान कृष्ण आए उन्होंने धर्म का चक्र का प्रवर्तन किया I जो 2500 साल तक जीवंत रूप में चला I इसके बाद भगवान बुद्ध आए उन्होंने एक नए धर्म का चक्र का प्रवर्तन किया I जो 2500 साल तक जीवंत रूप में चला I आधुनिक काल में ओशो आए I उन्होंने एक धर्म का चक्र का प्रवर्तन किया I जो जीवंत रूप में आगे 2500 साल तक चलने वाला है I समर्थगुरु धाम में ओंकार की साधना सिद्धार्थ ध्यान योग प्रथम तल के कार्यक्रम में साधकों को दी जाती है I
भगवान शिव स्वयं भी ध्यान और समाधि में लीन रहते हैं, और माता पार्वती को कहते हुए उन्होंने ध्यान और अध्यात्म के सूत्र दिए हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष ऑनलाइन शिवदरबार रविवार 15 फरवरी, 26 को समर्थगुरु द्वारा 09.15-10.00 बजे तक आरतीहीलिंग के माध्यम से भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा और औरा क्लींजिंग का अनुभव करने के लिए आयोजित किया जाएगा।
बुकिंग के लिए 📞9671400193/96 सम्पर्क कर सकते है।
भगवान शिव की पूजा में किस रंग के कपड़े पहनें ?
भगवान शिव की पूजा करते समय हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। लेकिन अगर आपके पास हरे रंग के वस्त्र न हों तो लाल, सफेद, पीला, केसरिया रंग का वस्त्र भी पहन सकते हैं। काले वस्त्र मत पहने I
महाशिवरात्रि पर व्रत और पूजन विधि :
भगवान शिव की पूजा के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें ।
यज्ञोपवीत धारण कर शरीर शुद्ध करें, तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें।
पूजन-सामग्री को यथास्थान रखकर रक्षा दीप प्रज्ज्वलित कर लें
इसके बाद पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश एवं गौरी-माता पार्वती का स्मरण कर पूजन करना चाहिए।
संकल्प करते हुए भगवान गणेश व माता पार्वती का पूजन करें फिर नन्दीश्वर, वीरभद्र, कार्तिकेय (स्त्रियां कार्तिकेय का पूजन नहीं करें) एवं सर्प का संक्षिप्त पूजन करना चाहिए।
इसके बाद हाथ में बिल्वपत्र एवं अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें।
महाशिवरात्रि व्रत कैसे करें ?
सारा दिन भगवान शिव का सुमिरन और ध्यान करें। मानसिक पूजा का विशेष महत्त्व है।
शाम से ही भगवान शिव की पूजा के लिए संपूर्ण सामग्री तैयार करें।
रात को भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा बड़े भाव से करने का विधान है।
प्रत्येक प्रहर की पूजा के पश्चात अगले प्रहर की पूजा में मंत्रों का जाप दोगुना, तीन गुना और चार गुना करें।
किसी की निंदा चुगलियों ,ईर्ष्या द्वेष से बचें। सभी के प्रति शुभ और मङ्गल भावना सम्पूर्ण विश्व के लिए रखें।
भक्त जन इस मंत्र का श्रद्धा पूर्ण जाप करें :
ॐ शिवाय: नमः ।
ॐ महादेवाय: नमः I

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