90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव धूमधाम से संपन्न

ब्रह्माकुमारीज द्वारा भव्य आयोजन, शिव–शंकर के आध्यात्मिक रहस्य पर हुआ मंथन।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/अमित) 15 फरवरी : महाशिवरात्रि पर्व परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण एवं दिव्य कर्म की स्मृति का पावन पर्व है। इसी उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विश्व शांति धाम सेवा केंद्र, कुरुक्षेत्र में 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं शिव ध्वज लहराने के साथ हुआ। मुख्य अतिथि श्रीमहंत श्री बंसी पुरी जी महाराज, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय साधु समाज (हरियाणा) का पारंपरिक रूप से शाल ओढ़ाकर एवं ईश्वरीय सौगात देकर हार्दिक अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण तथा दिव्य कर्म का यादगार पर्व” रहा। मंच संचालन करते हुए बी.के. मधु बहन ने ब्रह्माकुमारी संस्था का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि 1936 में छोटे से समूह से आरंभ हुई यह संस्था आज वटवृक्ष के समान विश्वभर में फैल चुकी है। उन्होंने ब्रह्मा बाबा (बाबा लेखराज) के जीवन-परिवर्तन एवं ईश्वरीय अनुभूति का उल्लेख किया।
सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी की अध्यक्षता में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमहंत बंसी पुरी महाराज जी, राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी, राधा बहन, शकुंतला बहन, मेहर सिंह मलिक (एडवोकेट), एडवोकेट महेंद्र सिंह तंवर (अखिल भारतीय क्षेत्रीय सभा अध्यक्ष), डॉ. आर.के. अग्रवाल (एन.आई.टी. कुरुक्षेत्र),दीनानाथ अरोड़ा, धर्मवीर सिंह (जिंदल हाउस), पंडित पवन शर्मा (प्रधान, ब्राह्मण सभा), धीरज गुलाटी, धर्मपाल गुप्ता (पूर्व प्रधान, अनाज मंडी), गुरफतेह सिंह कंग, संजय जिला संघ प्रमुख सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं प्रबुद्धजनों ने दीप प्रज्वलित कर और शिव ध्वज रोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में
कुमारी हरशीत एवं चिन्मय ने शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से शिव स्तुति प्रस्तुत की। गौरव, शैलजा, राजकुमार, पार्थ, अग्रिम एवं तन्वी ने लघु नाटिका द्वारा वर्तमान समय में फैले अंधविश्वास का पर्दाफाश करते हुए स्पष्ट किया कि शिव परमात्मा निराकार ज्योति-बिंदु हैं, जबकि शंकर देहधारी देव हैं—इसी कारण शिव के लिए परमात्मा नमः और शंकर के लिए देवाय नमः कहा जाता है। कुमारी गौरी ने नृत्य-नाट्य के माध्यम से “विश्व मंच पर आए, शिव रूद्र यज्ञ रचाए” भाव के साथ कल्याणकारी शिव की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। मुख्य अतिथि श्रीमहंत बंसी पुरी जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा प्रतिवर्ष शिवरात्रि पर शिव लीलाओं का गान किया जाना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड शिव में समाहित है—ज्ञान, वैराग्य, वेद और पुराणों के प्रणेता शिव हैं। शिव की कृपा के बिना कुछ भी पाना असंभव है।
उन्होंने माताओं की भक्ति को नमन करते हुए कहा कि भगवान को पाने के लिए तीर्थों या कंदराओं में जाना अनिवार्य नहीं—जहाँ सच्ची आवश्यकता और अहंकार का त्याग होता है, वहाँ भगवान स्वयं आ जाते हैं। “जिन्हें भगवान शिव का आश्रय हो, उन्हें किसी अन्य आश्रय की आवश्यकता नहीं”—यह संदेश उन्होंने विशेष रूप से दिया।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी ने पूज्य महंत जी और सभा में आए सभी बहन भाइयों का तहदिल से अभिनंदन स्वागत करते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था इस वर्ष 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती मना रही है और 89 वर्षों से विश्वभर में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश फैला रही है। उन्होंने शिवलिंग की तीन रेखाओं को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक बताते हुए सृष्टि-चक्र (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग) का सारगर्भित विवेचन किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव अज्ञानता का पर्दा हटाने के लिए अवतरित होते हैं और राजयोग के माध्यम से मन-बुद्धि को एकाग्र कर परमात्मा से जुड़ना ब्रह्माकुमारी संस्था में सिखाया जाता हैं।
बी.के. मुकेश ने मुख्य अतिथि का धन्यवाद करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था में केवल सुना ही नहीं जाता, बल्कि अनुभव भी कराया जाता है। बी.के. शकुंतला बहन जी ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
समापन अवसर पर सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी ने सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया तथा उपस्थित भाई-बहनों को प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम ने शिवरात्रि के आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुँचाते हुए शांति,पवित्रता और आत्मिक जागृति का संकल्प दृढ़ किया।




