गुरुकुल पहुंची सनातन जागरण राष्ट्र कल्याण यज्ञ यात्रा

युवा पीढ़ी के वैदिक संस्कृति से जोड़ना होगा : आचार्य नरेन्द्र।
थानेसर, (संजीव कुमारी) 20 फरवरी : वैदिक संस्कृति के ध्वजवाहक आचार्य नरेन्द्र जी के पावन सान्निध्य में रामेश्वरम् से कश्मीर के लाल चौक तक निकाली जा रही सनातन जागरण राष्ट्र कल्याण यज्ञ यात्रा वीरवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र परिसर में पहुंची जहां पर आर्ष महाविद्यालय के आचार्य सत्यप्रकाश, गुरुकुल के व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य सहित अन्य स्टाफ ने यज्ञ यात्रा में शामिल सभी आर्यजनों का ‘ओ३म्’ के पटके द्वारा भव्य अभिनन्दन किया।
इस अवसर पर गुरुकुल के ब्रह्मचारियों को सम्बोधित करते हुए आचार्य नरेन्द्र ने कहा कि आज युवा पीढ़ी को वैदिक संस्कृति से जोड़ना बेहद आवश्यक है क्योंकि आज युवा पश्चिमी संस्कृति की चकाचौंध में अपने पुरातन संस्कारों को भूलता जा रहा है। हमारे घरों में प्रतिदिन यज्ञ और अतिथि देवो भव की परम्परा थीं जो आज विलुप्त हो रही है, यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आर्यवर्त्त हमारे देश का प्राचीन नाम है जो आर्यों के नाम से विख्यात रहा है मगर आज हालात यह हैं कि देश के कई भागांं में वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार और अग्निहोत्र करने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है। गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानन्द जी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन चलाकर हजारों विस्थापित हिन्दुओं की पुनः वैदिक धर्म में घर वापसी करवाई थी, गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति को पुनः स्थापित करने के लिए देशभर में अनेक गुरुकुलों की स्थापना की, वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु जीवन पर्यन्त कार्य करते रहे, अब पुनः हमें ऋषि दयानन्द और स्वामी श्रद्धानन्द जी के दिखाए मार्ग पर चलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यज्ञ यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी के मन- मस्तिष्क में पुनः वैदिक संस्कृति और संस्कारों को स्थापित करना और आर्यों को संगठित करना है।
व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने आचार्य नरेन्द्र सहित पधारे सभी महानुभावों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु यह यज्ञ यात्रा एक जन-जागरण के रूप में पहचान बना रही है, अनेक स्थानों पर यज्ञ यात्रा का स्वागत किया जा रहा है। उन्होंने यज्ञ यात्रा में साथ चल रहे हवन कुण्ड में आहुति प्रदान कर विश्व कल्याण की कामना भी की। निश्चित तौर पर इस यज्ञ यात्रा से युवाओं में वैदिक संस्कृति और सनातन धर्म को लेकर विशेष आकर्षण उत्पन्न हो रहा है और युवा बड़ी संख्या में इससे जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामेश्वरम् से श्रीनगर के लाल चौक तक 1400 किमी. का लम्बा सफर तय कर लोगों में वैदिक संस्कृति के प्रति जाग्रति लाने वाले आचार्य नरेन्द्र सही मायनों में ऋषि दयानन्द के कृण्वन्तो विश्वार्यम् के ध्येय को पूरा करने में अहम योगदान दे रहे हैं। यह यज्ञ यात्रा लोगों में एक नई जाग्रति लाने में विशेष भूमिका अदा करेगी।




