भारत रत्न श्रीगुलजारी लाल नंदा भारतीय ज्ञान परम्परा के महान संत : स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज

भारत रत्न श्रीगुलजारी लाल नंदा भारतीय ज्ञान परम्परा के महान संत : स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज
केयू के ब्रह्मसरोवर स्थित श्रीगुलजारी लाल नंदा केन्द्र में नंदा जी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह आयोजित।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 15 जनवरी : पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि भारत रत्न श्रीगुलजारी लाल नंदा भारतीय ज्ञान परम्परा के महान संत रहे हैं जिन्होंने भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक चिंतन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भारत की भूमि से श्रीमद्भगवद्गीता, वैदिक संस्कृति एवं आध्यात्मिकता की परम्परा विश्व के हर कोने में दिप्तिमान रूप में स्थापित होगी। यह विचार उन्होंने गुरुवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ब्रह्मसरोवर स्थित श्रीगुलजारी लाल नंदा जी के सदाचार स्थल पर उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित कर व्यक्त किए। इस अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, कुवि कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल, थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा, जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, केडीबी के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार विजय सभ्रवाल, कृष्ण धमीजा, अशोक रोशा, संदीप छाबड़ा इत्यादि केन्द्र की निदेशिका प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. विवेक चावला व डॉ. कुलदीप आर्य ने सदाचार स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की। पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार घना कोहरा सूर्य की रोशनी, दिव्यता को थोड़ी कम कर देता है लेकिन उसकी दिव्यता को हमेशा दबाकर नहीं रख सकता। उसी प्रकार भारतीय प्राचीन आध्यात्मिक चिंतन एवं गौरवशाली परम्परा के बल पर भारत विश्व में अपना परचम लहराएगा। उन्होंने कहा कि जब 1966 में श्रीगुलजारी लाल नंदा जी गृहमंत्री थे तब गौ हत्या बंदी के लिए भारत के महान संत, ऋषि एवं मुनियों ने लाखों की संख्या में दिल्ली कूच किया था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री के निर्देश पर इन्हें रोकने एवं न मानने पर गोली चलाने के निर्देश भी दिए गए जिससे आहत होकर गृहमंत्री नंदा जी ने अपना त्यागपत्र भेजा था। उन्होंने कहा कि श्रीगुलजारी लाल नंदा भारतीय इतिहास में निष्काम कर्म, संत एवं एक योगी के रूप में स्थापित है, हमें इनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने नंदा जी केन्द्र के प्रयासों की भी सराहना की।
मुख्य वक्ता अरूण पराशर ने नंदा जी के जीवन मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने की बात कही। वहीं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि श्रीगुलजारी लाल नंदा जी दिव्य आत्मा के रूप में ऐसे भारतीय नेता रहे जिनसे हमें सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नंदा जी अपने जीवन में भारतीय संतों एवं गुरुओं को विशेष सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि नंदा जी राजनीतिक क्षेत्र में अद्वितीय ईमानदार एवं व्यवहार कुशल थे। इसके साथ ही उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन मूल्यों को भी याद किया। जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने नंदा जी के सरल स्वभाव, व्यक्तित्व एवं उनके महत्वपूर्ण योगदान, जीवन मूल्यों के बारे में वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में केडीबी के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल ने सभी अतिथियों को स्वागत किया तथा केन्द्र की निदेशिका प्रो. शुचिस्मिता ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मंच का संचालन केयू आईआईएचएस के डॉ. रामचंद्र ने किया।




