छोटे साहिबज़ादे धर्म, सत्य और साहस की अमिट मिसालः डॉ. कुलदीप सिंह

वीर बाल दिवस के अवसर पर छोटे साहिबज़ादों की अनुपम शहादत को किया गया याद।
कुरुक्षेत्र, (अमित )29 दिसम्बर : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के कुशल नेतृत्व में पंजाबी विभाग द्वारा छोटे साहिबज़ादों बाबा ज़ोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की अद्वितीय शहादत को समर्पित एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
पंजाबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने छोटे साहिबज़ादों की अनुपम शहादत को नमन करते हुए कहा कि छोटे साहिबज़ादे धर्म, सत्य और साहस की अमिट मिसाल थे। पौह का महीना सिख इतिहास में शहादत का महीना माना जाता है। सरबंस दानी गुरु गोबिंद सिंह जी की अनुपम कुर्बानी ने मानवता के कल्याण के लिए जो बलिदान दिया, उसकी विश्व में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती। जब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी सिंहों और अपने परिवार के साथ श्री आनंदपुर साहिब के किले से निकले, तो पूरा परिवार एक-दूसरे से बिछुड़ गया। गुरु साहिब तो सरसा नदी पार कर गए, लेकिन सरसा नदी में आए भयंकर बाढ़ के कारण छोटे साहिबज़ादे और माता गुजरी जी नदी पार नहीं कर सके और परिवार से अलग हो गए। डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि साहिबज़ादों की अनुपम शहादत अवर्णनीय है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि इस व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को धर्म, सत्य और अटूट साहस के मूल सिद्धांतों से जोड़ना है।
इस अवसर पर विद्वान वक्ता सरदार गुरमीत सिंह और सरदार बूटा सिंह ने सिख इतिहास पर प्रकाश डालते हुए छोटे साहिबज़ादों की निडरता, धार्मिक दृढ़ता और अत्याचार के सामने न झुकने वाली सोच पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में दी गई यह शहादत मानव इतिहास में अडिग विश्वास की अनुपम मिसाल है। आए हुए विद्वानों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के सामाजिक और नैतिक संकटों के समय में छोटे साहिबज़ादों की कुर्बानी हमें सत्य, न्याय और आत्म-सम्मान के लिए डटे रहने की प्रेरणा देती है। विद्यार्थियों ने भी विचार-विमर्श में सक्रिय भाग लिया और साहिबज़ादों की शहादत के ऐतिहासिक तथा समकालीन महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। पंजाबी विभाग के शोधार्थी मलकीत सिंह द्वारा साहिबज़ादों की स्मृति में उन्हें समर्पित कविशरी का गायन किया गया। सेमिनार के दौरान विभाग के अध्यापक डॉ. लता खेड़ा, डॉ. गुरप्रीत सिंह सहित विभिन्न विभागों के प्रोफेसर और शोधार्थी उपस्थित रहे।




