पिंगला भरथरी, हीर- रांझा, राजा नल दमयंती, वीर विक्रमाजीत के किस्सों की कुरुक्षेत्र में देखने को मिलेगी प्रस्तुति : डा. नरेंद्र सिंह

सबसे प्राचीन और परंपरागत विद्या सांग महोत्सव के 5 दिन में 24 सांगों की दी जाएगी प्रस्तुतियां।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 20 फरवरी : जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी डा. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में पिंगला भरथरी, हीर- रांझा, राजा नल दमयंती, वीर विक्रमाजीत के किस्सों की प्रस्तुति देखने को मिलेगी। प्रदेश में सबसे प्राचीन और परंपरागत विद्या सांग महोत्सव 5 दिन में 24 सांगों की प्रस्तुति दी जाएगी। इन प्रस्तुतियों से पंडित दादा लख्मीचंद, मांगेराम, पाले राम, धनसिंह, रामकिशन व्यास, पंडित जय नारायण, प्यारे लाल को जिंदा रखा जा रहा है। यह सांग महोत्सव 23 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक कलाकृति भवन हरियाणा कला परिषद के भरतमुनि रंगशाला के सभागार में आयोजित किया जाएगा।
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी डा. नरेन्द्र सिंह ने बातचीत करते हुए बताया कि सूचना जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा के महानिदेशक केएम पांडुरंग के आदेशानुसार व उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के मार्गदर्शन में धनपत सिंह सांग पुरस्कार के उपलक्ष्य में सांग महोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। हरियाणा के प्रसिद्ध सांगी धनपत सिंह के हरियाणा लोक संस्कृति योगदान को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की घोषणा उपरांत धनपत सिंह सांगी की स्मृति में इस वर्ष धनपत सिंह सांगी पुरस्कार की घोषणा की जानी है। इसके लिए 23 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक कलाकृति भवन हरियाणा कला परिषद के भरतमुनि रंगशाला के सभागार में सांग महोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह सांग महोत्सव 5 दिवसीय होगा।
उन्होंने कहा कि जिसमें हरियाणा संस्कृति को जीवंत रखे हुए सांग पार्टियां इस महोत्सव में भाग लेगी और हरियाणा की संस्कृति धरोहर को सहेजने का काम करेगी। इतना ही नहीं यह सांग महोत्सव सुबह 10 बजे से सायं के 6 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव में नगाड़ा वादन, लोकगायन और 3-5 घंटे तक चलने वाली लंबी सांग प्रस्तुतियां दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा का लोकनाट्य सांग समस्त विधाओं से ओतप्रोत रहता है। जिसमें अभिनय के साथ-साथ नृत्य, संगीत, रागनी इत्यादि शामिल रहती है। प्रत्येक कलाकार पूरे रियाज के बाद 3 से 5 घंटे की प्रस्तुति से हरियाणा की पारम्परिक लोक विधाओं को किस्सें के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं।
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी डा. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि 23 फरवरी को सांगी नेरन द्वारा वीर विक्रमाजीत का, सांगी राजेश कुमार द्वारा हीर रांझा का, सांगी राजपाल द्वारा राजा नल दमयंती और सांगी आजाद सिंह द्वारा पिगंला भरथरी का किस्सा पेश किया जाएगा। दूसरे दिन 24 फरवरी को सांगी कुलदीप द्वारा हीरामल्ल जमाल का, सांगी संजय द्वारा जानी चोर का, सांगी सुभाष द्वारा बणदेवी का, सांगी सतपाल द्वारा गोपी चंद का और सांगी नितिन कुमार द्वारा चंद्रप्रभा मदनपाल का किस्सा पेश किया जाएगा। इसी तरह तीसरे दिन 25 फरवरी को सांगी समंदर द्वारा लीलो चमन का, सांगी कृष्ण लाल द्वारा बणदेवी का, सांगी कृष्ण कुमार द्वारा पिंगला भरथरी का, सांगी स्वामी कर्ण सिंह द्वारा शाही लकड़हारा और सांगी वेद प्रकाश अत्री द्वारा दुष्यंत शकुंतला का किस्सा पेश किया जाएगा।
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी डा. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि चौथे दिन 26 फरवरी को सांगी सोनू द्वारा बणदेवी का, सांगी उस्मान द्वारा राजाल नल दमयंती का, सांगी इंद्र सिंह द्वारा हीरा मल्ल जमाल का, सांगी राजेश कुमार द्वारा गोपी चंद का और सांगी रतन भारती द्वारा सेठ ताराचंद का किस्सा पेश किया जाएगा। अंतिम दिन 27 फरवरी सांगी रामशरण द्वारा धर्म की जीत का, सांगी राजेंद्र सिंह द्वारा बणदेवी, सांगी रमेश कुमार द्वारा धर्म की जीत का, सांगी बाबू लाल द्वारा राजा उत्तानपाद ध्रुव का जन्म का और सांगी विष्णुदत्त द्वारा विराट पर्व का किस्सा प्रस्तुत किया जाएगा।




