विदेशी चकाचौंध ने बजाया राजा रेशमलाल का बाजा

विदेशी चकाचौंध ने बजाया राजा रेशमलाल का बाजा

शान को बरकरार रखने के लिए राजा ने खुद लुटा दिया राजपाट।
राजा का बाजा देख हंसी से लोटपोट हुए दर्शक, तालियों से गूंजा सभागार।

कुरुक्षेत्र 23 जुलाई : हरियाणा कला परिषद और रंगआधार कल्चरल ग्रुप के संयुक्त सहयोग से राजकीय आदर्श संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित रंग नाट्य उत्सव के दूसरे दिन अमरदीप जांगड़ा के नेतृत्व में नाटक राजा का बाजा प्रस्तुत किया गया। अलकनंदन द्वारा लिखित नाटक उजबक राजा तीन डकैत पर आधारित हास्य रस से भरपूर नाटक राजा का बाजा में कलाकारों ने स्वदेशी अपनाओ का सुंदर संदेश दिया। नाटक की कहानी राजा रेशमलाल के इर्द-गिर्द घूमती है। राजा रेशमलाल को तरह-तरह के कीमती वस्त्र पहनना अच्छा लगता है। जिसके लिए राजा राजकोष को प्रजा की भलाई की अपेक्षा अपने वस्त्रों पर अधिक खर्च करता है। एक दिन राजा को सूचना मिलती है कि उनके पड़ोसी राजा देशबंधू उनके साथ फैंसी ड्रैस कम्पीटिशन करने के लिए आ रहे हैं। फैंसी ड्रैस कम्पीटिशन का सुनकर राजा रेशमलाल देश के अलग-अलग राज्यों से दर्जी बुलाते हैं ताकि कम्पीटिशन के लिए शानदार कपड़े बनवा सके। लेकिन राजा को कोई भी स्वदेशी कपड़े पंसद नहीं आते। बाद में राजा रेशमलाल को पता चलता है कि देशबंधू ने विदेशी दर्जियों से कपड़े तैयार करवाए हैं। जिसके कारण राजा रेशमलाल अपने मंत्री से विदेशी दर्जी बुलवाने को कहता है। एक दिन दो ठग विदेशी दर्जी बनकर राजा के पास पहुंचते है और राजा को बताते हैं कि वो राजा के लिए जादू की ड्रैस बनाएंगे, जो केवल खानदारी और रईसों को ही दिखाई देगी, मुर्ख या फटीचर लोग कपड़े को नहीं देख पाएंगे। जादू के सूट के बदले ठग राजा से करोड़ो रुपये ऐंठ लेते हैं। जब रानी को पता चलता है तो रानी ठगों की मशीन को तोड़ देती है। लेकिन ठग राजा को बताते हैं कि रानी ने जलन के कारण राजा के जादू के सूट को खराब कर दिया। जिसके कारण नया सूट बनाने के लिए ठग राजा से और पैसे ले लेते हैं। कम्पीटिशन वाले दिन ठग राजा को नंगा करके सब धन लूटकर ले जाते हैं। जब राजा देशबंधू कॉम्पिटिशन के लिए पहुंचते हैं तो पता चलता है कि वो भी नंगे हैं और उनसे पहले ठग राजा देशबंधु को लूटकर आए हैं। इस प्रकार हास्य रस से भरपूर नाटक ने विदेशी निवेश को छोड़कर स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया। नाटक में कलाकारों के अभिनय के साथ-साथ कलाकारों की वेशभूषा तथा संगीत ने भी नाटक को सफल बनाने में सहयोग दिया। नाटक में राजा रेशमलाल का किरदार सूर्यांश चावला, मंत्री हितेश जंगम, रानी रचना अरोड़ा, देशबंधू ध्रुवम गोयल, ठग ऋत्विक अरोड़ा तथा नव्या मेहता बने। नौकरानियों का किरदार वेदिता तथा कनिका शर्मा, दर्जी गौरव व रोहित तथा, चौबदार का किरदार प्रिंयाशु बंसल ने निभाया। अंत में सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद से विकास शर्मा, सुदेश कुमारी, शिवकुमार किरमच, अमरदीप जांगड़ा सहित भारी संख्या में विद्यालय के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने नाटक का आनंद लिया।

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