
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय (मसुविवि) का तृतीय दीक्षांत समारोह शिक्षा, संस्कृति, डिजिटल नवाचार और सामाजिक सरोकारों के संगम का साक्षी बना। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित भव्य समारोह में जहां विद्यार्थियों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए, वहीं छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। समारोह में 74 मेधावियों को कुल 88 पदकों से सम्मानित किया गया, जिसमें छात्राओं की संख्या उल्लेखनीय रही।
समारोह में डिजिटल शिक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। विद्यार्थियों के अंकपत्र और उपाधियों को सीधे डिजीलॉकर (DigiLocker) से जोड़ने की व्यवस्था शुरू की गई। इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और डिजिटल सुविधा की दिशा में अहम कदम माना गया।
धैर्य, साधना और अभ्यास को सफलता की कुंजी बताया
समारोह के मुख्य अतिथि एवं विश्व प्रसिद्ध बांसुरी वादक पद्मविभूषण पं. हरि प्रसाद चौरसिया ने विद्यार्थियों को अपनी जीवन यात्रा से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को सफलता में बदलने के लिए धैर्य, साधना और निरंतर अभ्यास जरूरी है। उनकी जीवन यात्रा और बांसुरी की साधना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रही।
मानद उपाधि से सम्मानित गुजरात के पटोला शिल्पकार पंकजभाई डूंगरभाई मकवाना ने प्राचीन डबल इकट पटोला बुनाई परंपरा को संरक्षित करने के अपने संघर्ष को साझा किया। उन्होंने युवाओं को स्थानीय कला, कौशल और परंपराओं से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने का संदेश दिया।
कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल आधारित, रोजगारपरक और लचीली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में युवाओं को रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार देने में भी सक्षम बनाया जाना जरूरी है।
गोद लिए गांवों के मेधावी भी हुए सम्मानित
दीक्षांत समारोह में शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों की मिसाल भी देखने को मिली। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों—सोनापुर, महरूपुर, धरवारा, सीही और समेंदा—के 24 मेधावी छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने शैक्षिक किट और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को रंग-बिरंगी पुस्तकें, स्कूल बैग और प्रेरक कहानियां वितरित की गईं। बच्चों ने लोकगीतों और देशभक्ति कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर समारोह में मौजूद लोगों का मन मोह लिया।
स्वास्थ्य और पोषण पर भी रहा जोर
समारोह के दौरान स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। एचपीवी टीकाकरण की स्थिति का जायजा लेने के साथ आजमगढ़ और मऊ की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रमाण-पत्र और किट वितरित किए गए। इससे शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता को जोड़ने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता भी सामने आई।
नए भवनों का लोकार्पण, पुस्तकों का विमोचन
समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली कई परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। इनमें महिला एवं पुरुष छात्रावासों की चहारदीवारी, दत्तात्रेय सरोवर, चरक वानस्पतिक उद्यान, तमसा वन और इंडियन बैंक की नई शाखा प्रमुख हैं।
शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की अर्धवार्षिक पत्रिका तथा प्राध्यापकों द्वारा रचित छह नई पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए डॉ. प्रियंका सिंह, प्रो. गीता सिंह और प्रो. अरुण कुमार समेत चार शिक्षकों को ‘उत्कृष्ट शिक्षक अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
मसुविवि का तृतीय दीक्षांत समारोह इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि उच्च शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि कौशल, संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता के जरिए समाज और राष्ट्र के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है।

