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धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में ‘गीता कंठनाद महोत्सव’ का भव्य समापन: मानवता के संकट का एकमात्र समाधान है श्रीमद्भगवद्गीता

थानेसर, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 28 मार्च : कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर ‘गीता परिवार’ द्वारा आयोजित ‘गीता कंठनाद महोत्सव’ का समापन सत्र आज आध्यात्मिक दिव्यता और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज एवं गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने संपूर्ण वातावरण को गीता-मयी ऊर्जा से अभिसिंचित कर दिया।
विशिष्ट अतिथियों का समागम।
समारोह में स्वामी संपूर्णानंद जी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री श्री राज बिहारी जी, संगठन मंत्री श्री रविंद्र बनियाला जी, श्री नीरज जी, श्री पवन जी, प्रांत अध्यक्ष श्री वरुण जी, प्रांतीय महामंत्री श्री विवेक जी, श्रीमती गीता जी एवं पतंजलि योग से श्री जयदीप आर्य जी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
अभिनव प्रतिभा प्रदर्शन एवं ‘साधन गीता’ का विमोचन।
मंच पर ‘अर्जुन’ एवं ‘पार्थ’ टीम के नन्हे प्रतिभागियों ने जब व्युत्क्रम, चरण अनुसार और गणितीय गुणांक पद्धति से गीता पाठ का प्रात्यक्षिक प्रदर्शन किया, तो उपस्थित मनीषी स्तब्ध रह गए। अतिथियों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि इन बालकों की तैयारी ने ‘परीक्षा लेने’ के कार्य को ‘परीक्षा देने’ से भी अधिक कठिन बना दिया है।
इस अवसर पर गीता साधकों हेतु अत्यंत उपयोगी पुस्तक ‘साधन गीता’ का विमोचन भी किया गया, जो शीघ्र ही जिज्ञासुओं हेतु उपलब्ध होगी।
सम्मान एवं पुरस्कार वितरण।
सत्र के मध्य दो विशिष्ट सम्मान प्रदान किए गए:
गीता ओलंपियाड पुरस्कार: मेरठ की १३ वर्षीय बालिका मनस्वी शर्मा को उनकी विलक्षण प्रतिभा हेतु प्रथम पुरस्कार स्वरूप १,०००,००/- (एक लाख) रुपये की राशि प्रदान की गई।
अध्यात्म सेवा सम्मान: मणिपुर की पावन भूमि पर धर्म एवं अध्यात्म के संरक्षण हेतु श्री ब्रजमनी शर्मा एवं श्री प्रदीप शर्मा को सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि गीता प्रेस गोरखपुर के माध्यम से मणिपुरी भाषा में गीता के प्रचार-प्रसार हेतु आपके प्रयास स्तुत्य हैं।
गीता प्रचार का संकल्प।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए डॉ. आशु गोयल ने बताया कि ‘लर्न गीता’ अभियान अब १५ लाख से अधिक पंजीकरणों के साथ विश्वव्यापी स्वरूप ले चुका है। उन्होंने भगवद्गीता के १८वें अध्याय के ६९वें श्लोक को उद्धृत करते हुए संकल्प दोहराया कि हम श्री कृष्ण के संदेशवाहक बनकर तन-मन-धन से इस सेवा कार्य में निरंतर रत रहेंगे।
आशीर्वचन: मानवता का संकट और गीता का समाधान।
योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने १,००० गीता व्रतियों को ‘साक्षात् चलती-फिरती गीता की मूर्ति’ बताते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा, “दैवी संपदा ही वास्तविक संपत्ति है, शेष सब विपत्ति है। आज वैश्विक संघर्षों और सुनियोजित आतंकवाद का समाधान मिसाइलों में नहीं, अपितु श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन में निहित है।” स्वामी जी ने परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज को ‘ईश्वर का अंशावतार’ बताते हुए उनके ऋषिवत् जीवन की सराहना की।
ईश्वरीय संकल्प का प्रतिफल।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने उद्घोष किया कि कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता परिवार का यह पुरुषार्थ कोई साधारण मानवीय कार्य नहीं, बल्कि साक्षात् ईश्वरीय योजना का परिणाम है। यह आयोजन कुरुक्षेत्र के महत्त्व को विश्व पटल पर पुन: प्रतिष्ठित करेगा। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों हेतु अपना पूर्ण समर्थन और आशीर्वाद प्रदान किया।

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