
हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
हिसार संवाददाता – वैभव गुप्ता दूरभाष 9416191877
हिसार,27 जुलाई : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़ के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित “पशुओं में सफल गर्भधारण के लिए सहायक पंजिका” को भारत सरकार द्वारा आधिकारिक कॉपीराइट प्रदान किया गया है। यह कॉपीराइट डॉ. दविंदर सिंह, डॉ. ज्योति शुन्थ्वल, डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय एवं डॉ. सुजॉय खन्ना को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
कॉपीराइट प्राप्त होने पर वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. सुशीला मान तथा क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दिनेश मित्तल भी उपस्थित रहे। कुलपति ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई ऐसी शोध आधारित सामग्री वैज्ञानिक एवं लाभकारी डेयरी पशुपालन को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान को सरल एवं व्यावहारिक रूप में पशुपालकों तक पहुँचाकर उनकी आय और उत्पादकता में वृद्धि करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इसी प्रकार किसान हितैषी नवाचारों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को नई तकनीकें उपलब्ध कराते रहेंगे।
यह सहायक पंजिका पशुपालकों, पशु चिकित्सकों तथा विद्यार्थियों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप डिसीजन ट्री (Decision Tree) के रूप में तैयार की गई है। इसका उद्देश्य दुधारू पशुओं में समय पर गर्मी में न आना तथा बार-बार गर्भाधान के बावजूद गर्भधारण न होने जैसी प्रजनन संबंधी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान में सहायता प्रदान करना है।
इस डिसीजन ट्री के माध्यम से उपयोगकर्ता पशु के लक्षणों, स्वास्थ्य स्थिति, प्रजनन इतिहास तथा क्षेत्रीय परिस्थितियों के आधार पर उचित निर्णय तक आसानी से पहुँच सकते हैं। इसमें साइलेंट हीट, कृत्रिम गर्भाधान (एआई) का उपयुक्त समय, असामान्य प्रजनन स्राव की पहचान एवं प्रबंधन, संतुलित पोषण, मिनरल सप्लीमेंटेशन तथा अन्य वैज्ञानिक प्रजनन एवं प्रबंधन उपायों की व्यावहारिक जानकारी शामिल की गई है। यह पंजिका गर्भाधान की सफलता दर बढ़ाने, प्रजनन दक्षता में सुधार लाने तथा डेयरी पशुपालन में होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में उपयोगी सिद्ध होगी।
यह उपलब्धि लुवास के साथ-साथ देश में पशुपालन एवं पशु प्रजनन अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।


