तावडू कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में योगासन पश्चात हुआ मासिक हवन

तावड़ू/फरीदाबाद प्रमोद कौशिक, 21 जून : कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में रविवार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तथा मासिक हवन का सफल आयोजन किया गया।

आयोजन में क्षेत्र के अनेक महानुभावों और गोभक्तों ने भाग लेकर कार्यक्रम का लाभ उठाया।


इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि श्री दुर्गा शंकर मिश्रा, आई ए एस (सेवानिव्रत), पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश, आशीर्वचन एवं मार्गदर्शन परम श्रद्धेय स्वामी सम्पूर्णानन्द सरस्वती जी, संस्थापक – वेद विद्या शोध संस्थान, कुरुक्षेत्र तथा हरियाणा राज्य और देश के अनेक महानुभाव उपस्थित रहे।
आज प्रातः अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संस्थान के प्रांगण मे डॉक्टर विश्वास के मार्गदर्शन मे योगसत्र का आयोजन किया गया जिसमे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के गोभक्तों ने लाभ उठाया। योगसत्र का आयोजन प्रातः काल सुबह 6.30 से 7.30 तक किया गया जिसमे मुख्यतया स्वामी सम्पूर्णानन्द सरस्वती जी, दुर्गा शंकर मिश्रा, डॉक्टर एस पी गुप्ता, श्रीमती विष्णु भगवान, श्रीमती शशि गुप्ता, प्रियंक गुप्ता इत्यादि उपस्थित रहे।
योगसत्र के उपरांत डॉक्टर एस पी गुप्ता जी ने अपने सम्बोधन मे सभी को 12वे अंतर्राष्ट्रीय योगदिवस की कामधेनु गोधाम की तरफ से सभी को बधाई दी। उन्होंने बताया कि योग से हमारे सभी दुख दूर हो सकते है। योग हमारे स्वास्थ्य का संवर्धन करता है, हमारे रोगों की चिकित्सा करता है, हमारी मन और बुद्धि को शुद्ध करता है और योग से ही हम परमात्मा से जुड़ते है। गुप्ता जी ने पधारे हुए मुख्य महानुभाव दुर्गा शंकर मिश्रा और स्वामी सम्पूर्णानन्द सरस्वती जी का संक्षिप्त परिचय दिया और उनका योग-सत्र मे शामिल होने के लिए भी धन्यवाद किया।
प्रियंक गुप्ता ने बताया कि इस संस्थान का मुख्य वाक्य है स्वस्थ शरीर ही परम लक्ष्य है जो योग के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
श्री दुर्गा शंकर मिश्रा जी ने संस्थान के सुरम्य वातावरण का जिक्र करते हुए उन्होंने गुप्ता जी और संस्थान मे काम करने वालों का 12वे अंतर्राष्ट्रीय योग-सत्र को आयोजित करने के लिए धन्यवाद किया। योग के आदियोगी भगवान शंकर ने आरोग्य जीवन जीने के लिए योग की सौगात दी, जिसे हमारे पूज्य संतों / ऋषियों ने योग की परंपरा को आगे बढ़ाया और जिसे सूत्रबद्ध किया महर्षि पतंजलि ने। उसके बाद योग हमारे जीवन की शैली बन गई। लेकिन धीरे-धीरे जो हम परतंत्र रहे हम योग को भूल गए और योग थोड़े-बहुत लोगों मे सिमट कर रह गया। वर्तमान मे योग को पुनर्स्थापित करने मे और जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय स्वामी रामदेव जी को जाता है। योग की गरिमा है कि यह तन और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। उन्होंने पतंजलि के प्रथम सूत्र ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः का जिक्र करते हुए बताया कि तन और मन की चंचलता को निरुद्ध करने के लिए योग बहुत जरूरी है। उन्होंने योग को अंतर्राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रचारित और प्रसारित करने के लिए हमारे परम आदरणीय यशस्वी, ओजस्वी और तेजस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को साधुवाद दिया। हम पूरी धरती को अपना परिवार मानते है क्योंकि वसुधैव कुटुंबकम हमारे वेदों की वाणी है। इस वर्ष का योग का विषय है “बढ़ती हुई उम्र के लोगों के लिए योग”। कैसे हम स्वस्थ रह सकते है। हम विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त है खासतौर से ज्यादा उम्र के लोग जो ब्लड प्रेशर, डाइबीटीस, हार्ट, किड्नी, घुटनों, डिप्रेशन की बीमारियों से ग्रस्त है और उनका सबसे आसान और किफायती उपाय योग है। उन्होंने बताया कि वर्तमान मे हमारे देश मे 60 वर्ष की उम्र से ज्यादा व्यक्तियों की संख्या लगभग 15 करोड़ है और 2047 तक यह संख्या 30 करोड़ होने का अनुमान है। बढ़ती हुई उम्र मे स्वास्थ्य की उत्तम गुणवत्ता बढ़ाने के लिए योग ही एकमात्र माध्यम है। आखिर मे उन्होंने इस योग-सत्र मे आमंत्रित करने के लिए गुप्ता जी का धन्यवाद दिया और बताया की गुप्ता जी इस संस्थान का निर्माण और संवर्धन करके सेवानिव्रत जीवन को भी सफल कर लिया है जो सभी के लिए एक स्वस्थ और सशक्त प्रेरणा है।
स्वामी सम्पूर्णानन्द जी ने अपने सम्बोधन मे योगविद्या और भोगविद्या के अंतर को उदाहरण सहित बताया। उन्होंने षड्दर्शन योग, सांख्य, वैशेषिक, न्याय, वेदान्त और मीमांसा दर्शनों के बारे मे भी संक्षेप मे बताया। स्वामीजी ने स्वर्ग (जिस सुख मे किसी दूसरे का कोई योगदान नहीं है|) और नरक (जिसमे सुख है ही नहीं) की भी व्याख्या की। जिसमे करने के पहले, करने के दौरान और करने के बाद भी सुख है वही स्वर्ग है और जिसमे करने के पहले, करने के दौरान और करने के बाद भी सुख नहीं है वह नरक है।
योग-सत्र उपरांत हवन से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। हवन का संचालन आदर्श गर्ग ने किया । हवन प्रथा के अनुसार जून मास में जिन लोगों के जन्मदिवस, विवाह की वर्षगांठ एवं पुण्यतिथि थी, उनके नाम से अग्नि देव को आहुति अर्पित की गई तथा समस्त मानव जाति के हित में सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई।
मञ्च का संचालन संस्थान के महासचिव प्रियंक गुप्ता ने किया। उन्होंने बताया कि योग को अपनाने से तनाव से मुक्त हो सकते है। योग को जीवन शैली बनाने की जरूरत है। अपने स्वास्थ्य की चिंता हमे स्वयं करनी होगी। उन्होंने संस्थान की स्थापना 2008 से वर्तमान तक कैसी-कैसी विषम परिस्थितियां यहाँ रही है उसकी संक्षिप्त जानकारी दी।
स्वागत कार्यक्रम में दुर्गा शंकर मिश्रा का स्वागत सुनील जिंदल, ब्रहमदत और शशि गुप्ता ने, स्वामी सम्पूर्णानन्द जी का उषा गर्ग, राज गर्ग और डिम्पल गुप्ता ने और मदन जिंदल का अंकित गुप्ता, अनुपम गुप्ता और तेजपाल ने गोगुल्लक, तुलसी का पौधा, कामधेनु स्मृति चिन्ह एवं पटका भेंट करके किया।
मास्टर ईशान गुप्ता ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन मे बताया कि योग से शरीर मजबूत बनता है और मन शांत रहता है।
आई पी एस आलोक गुप्ता, आई पी एस गोवा द्वारा रचित पुस्तक “सांझे लहरों की महक” संस्थान को अर्पित की गई।
डॉक्टर एस पी गुप्ता ने मंचासीन महानुभावों का परिचय देते हुए बताया कि महर्षि पतंजलि ने योग के 8 अंग बताए है। “स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है” संस्थान के निर्माण का मुख्य उद्देश्य है। गोमाता सृष्टि मे एकमात्र ऐसा प्राणी है जो 24 घंटे आक्सिजन प्रदान करती है।
सुमित्रा देवी जी ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन मे बताया कि स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। स्वस्थ शरीर के द्वारा ही परमात्मा साक्षात्कार संभव है। उन्होंने चेतना जाग्रत करने और आत्म-साक्षाकार के लिए सभी को प्रेरित किया।
मदन जिंदल जी ने “कभी रूठना ना मुझसे तू श्याम साँवरे” भजन गाया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान सिर्फ एक गोशाला मात्र नहीं है बल्कि एक शक्तिपीठ है।
कुमारी आयशा गुप्ता और ईशान गुप्ता को उनको अध्ययन मे उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने और प्रतिभा-संपन्न होने के लिए सम्मानित किया गया।
दुर्गा शंकर मिश्रा जी ने अपने वक्तव्य मे बताया कि वह अपनी धर्मपत्नी सहित यहाँ आए है और यहाँ नियमित रूप से आना चाहेंगे। आज का दिन सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात है। यह वह भारत भूमि है जिसमे देवता भी जन्म पाने की इच्छा रखते है। एक समय था कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था का लगभग 30 प्रतिशत का केंद्र भारत था। आज के भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व मे भारत दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा है फिर भी हम गुलामी की मानसिकता से मुक्त नहीं हो पा रहे है। जामनगर मे आयुर्वेद पर शोध चल रहा है कि पूरी दुनिया कैसे स्वस्थ हो सके। योग से हम सिर्फ स्वस्थ नहीं रहते बल्कि स्वस्थ सोचते भी है और नकारात्मकता से भी मुक्त होते है। “योगः कर्मसू कौशलम” के मंत्र के साथ योग आज पूरी दुनिया मे वसुधैव कुटुंबकम की धारणा के साथ संचालित हो रहा है। योग करिए और योग करवाइए। उन्होंने सूर्योदय से पहले उठने के भी दिव्य लाभ का वर्णन किया। मन की गुलामी को दूर फैकें और विकसित राष्ट्र की और अपने कदम बढ़ायें जिसमे योग की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है।
स्वामी सम्पूर्णानन्द जी ने अपने वक्तव्य मे बताया कि स्वस्थ रहने के लिए दिन मे भोजन करना चाहिए अर्थात सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि करीब 5000 वर्ष पहले महर्षि चरक की अध्यक्षता मे एक कॉनफेरेंस का आयोजन किया गया था जिसका मुख्य विषय था “व्यक्ति की बीमारी मुख्य कारण क्या है और सभी रोगों की दवाई क्या है।“ जिसमे उपस्थित संतों / ऋषियों ने अपने विचार व्यक्त किए। आखिर मे अपने दुनिया के सबसे संक्षिप्त अध्यक्षीय भाषण मे महर्षि चरक ने बताया “सर्वेषां रोगाणाम् मूलं प्रज्ञापराधः” (सभी रोगों का मूल कारण प्रज्ञापराध है) प्रज्ञापराध का अर्थ है- अपनी बुद्धि या ज्ञान का उपयोग न करके जानबूझकर या गलती से प्रकृति के नियमों के विरुद्ध आचरण करना। सुविचार सभी रोगों की औषधि है। अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र के सबसे प्रणेता आचार्य चाणक्य हुए है। हमे अपनी दिनचर्या ठीक करनी चाहिए। उन्होंने “बीमारी को स्वास्थ्य का अपहरणकर्ता बताया”। मनुष्य अपने शरीर की कीमत नहीं समझता। हम है तो दुनिया है, हम गए तो दुनिया गई। आखिर मे उन्होंने बताया कि डॉक्टर एस पी गुप्ता और श्रीमती शशि गुप्ता जी ने इस संस्थान के निर्माण और संवर्धन मे लगकर अपने को धन्य कर लिया है।
अध्यक्षा शशि गुप्ता ने अपने धन्यवाद प्रस्ताव में बताया कि हम वेदों को तो भूल ही चुके है। हमारे देश का नेतृत्व साधु संतों ने ही किया है। उन्होंने बताया कि आज स्वामीजी की उपस्थिति से यह आभास होता है जैसे कि आज स्वयं स्वामी दयानंद सरस्वती जी ही मौजूद है। दुर्गा शंकर मिश्र जी जमीन से जुड़े मानव है। उनके विचार और जीवन मे जो सादगी और सरलता है उसने सभी को गदगद कर दिया है। उन्होंने सभी को संस्थान मे पुनः पुनः पधारने के लिए आमंत्रित किया।
इसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने कामधेनु मन्दिर एवं कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान का अवलोकन किया तथा गौवंश को सवामणि एवं चारा अर्पित करने के उपरान्त प्रसाद ग्रहण किया ।
इस अवसर पर श्रीमती विष्णु भगवान, जय सिंह एसीपी, दिनेश राघव – बीजेपी प्रवक्ता, डॉक्टर विवेक बाल्यान (ऐमिटी), जितेंद्र यादव, रुचिर गुप्ता, सुनीता देवी, सोनिया बेमबी, ज्योति शर्मा, तेजपाल तंवर, वंदना, नवीन झा, बृंदावन बिस्सर सहित क्षेत्रीय गांवों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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