एमओयू से छात्रों के लिए खुलेंगे वैश्विक संभावनाओं के द्वारः प्रो. सोमनाथ सचदेवा

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर शोध व नीति संवाद को मिलेगा नया आयामः वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान।
कुवि ने नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के साथ मिलाया हाथ।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 12 मार्च : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडो-पैसिफिक स्टडीज और नई दिल्ली स्थित देश की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल ने तथा एनएमएफ की ओर से वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान, डायरेक्टर जनरल, नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन, नई दिल्ली ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा इस कार्यक्रम के दौरान ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे और अपनी अध्यक्षता में इस प्रक्रिया को संपन्न कराया।
एमओयू के लिए बधाई देते हुए कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इंडो- पैसिफिक क्षेत्र सामरिक, आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का लक्ष्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें वैश्विक चुनौतियों और रणनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना है। प्रो. सचदेवा ने कहा कि एनएमएफ जैसी शीर्ष संस्था के साथ इस साझेदारी से विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अनूठा अवसर मिलेगा। यह पहल विकसित भारत 2047 के संकल्प की दिशा में एक सशक्त कदम है।
वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक रणनीति, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों और थिंक-टैंकों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है, ताकि शोध और नीति निर्माण के बीच मजबूत सेतु स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देगी। इस सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद, संयुक्त शोध परियोजनाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान के अवसर प्राप्त होंगे।
इस महत्वपूर्ण साझेदारी को संभव बनाने में कुवि के इंडो-पैसिफिक सेंटर के निदेशक प्रो. वी.एन. अत्री की केंद्रीय भूमिका रही। प्रो. अत्री ने इस समझौते की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि आईसीआईपीएस की स्थापना के पीछे की सोच पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केंद्र के उद्देश्यों और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के कार्यों के बीच गहरा सामंजस्य है। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थान समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री कनेक्टिविटी तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे विषयों पर मिलकर कार्य कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस एमओयू के तहत भविष्य में संयुक्त कार्यशालाएं, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और शोध परियोजनाएं संचालित की जाएंगी, जिससे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्रों को वैश्विक थिंक-टैंक के साथ काम करने का सीधा अनुभव प्राप्त होगा।
नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन की ओर से वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान (एवीएसएम एंड बार, वीएसएम), डायरेक्टर जनरल के साथ कॉमोडोर जय बेदी (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर), कैप्टन योगेन्द्र प्रकाश शर्मा (डिप्टी डायरेक्टर), कॉमोडोर मनीष सिन्हा (सीनियर फेलो), कैप्टन रणेंद्र सिंह सावन (सीनियर फेलो), कैप्टन भारत दीप गौर (सीनियर फेलो), कैप्टन के.एस. विक्रमादित्य (सीनियर फेलो), मुस्कान राय (रिसर्च एसोसिएट), चिताली कोहली (प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव), रश्मि यादव (रिसर्च एसोसिएट) और जॉन जे. वचापरम्बिल (एसोसिएट फेलो) तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. जसबीर ढांडा, डीन सोशल साइंस प्रो. संजीव बंसल, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. मोहिन्द्र चांद, प्रो. रीटा, प्रो. अशोक चौहान, प्रो. राजेश कुमार, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. सलोनी दीवान, डॉ. रमेश सिरोही, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. प्रिया शर्मा और डॉ. निधि बगरिया मौजूद रहे।




