देश की आर्थिक प्रगति में प्राकृतिक, पूंजीगत व मानव संसाधन का महत्वपूर्ण योगदान : डॉ. डीआर अग्रवाल

केयू यूआईईटी में बौद्धिक सम्पदा अधिकार विषय पर हुआ मंथन।
कुरुक्षेत्र, (संजीव कुमारी) 11 फरवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू यूआईईटी संस्थान में बौद्धिक सम्पदा अधिकार विषय पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता डॉ. डी.आर. अग्रवाल, निदेशक, इंटरनेशनल ट्रेड इंस्टीट्यूशन, कोलकाता ने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति में प्राकृतिक, पूंजीगत व मानव संसाधन का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने अमेरिका, चीन और भारत की जीडीपी का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिन देशों ने नवाचार, अनुसंधान और पेटेंट पर अधिक ध्यान दिया, वे आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने आईपीआर के अंतर्गत नवीनता, आविष्कार और औद्योगिक अनुप्रयोग के महत्व को विस्तार से समझाया।
डॉ. अग्रवाल ने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए जोर देते हुए कहा कि नए अनुसंधान ही नए रोजगार के अवसर सृजित करने की नींव है। उन्होंने एनईपी 2020 के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा स्तर से ही नवाचार और शोध को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने आईपीआर इकोसिस्टम में रचनात्मकता, उत्पादन, तकनीकी पहलू, कानूनी पहलू तथा उसके उपयोग की सही समझ अत्यंत आवश्यक है।
केयू डीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी व निदेशक यूआईईटी प्रो. सुनील ढींगरा ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने में स्टार्टअप, नवाचार एवं उद्यमिता की अहम भूमिका है। उन्होंने समय के अनुसार स्टार्टअप के प्रति बदलती छात्रों की मानसिकता पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेश अग्निहोत्री ने किया। इस अवसर पर प्रो. संजीव अग्रवाल, डॉ. उर्मिला, डॉ. निखिल मारीवाला, डॉ. राम अवतार, डॉ. नीरा राघव, डॉ. सुरेश दुआ, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. सुमन मेहंदिया सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।




