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सच्चे शिष्यों हेतु ओंकार दीक्षा मुख्य है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया

थानेसर, (संजीव कुमारी) 2 फरवरी : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि हिसार में आयोजित त्रिदिवसीय सिद्धार्थ ध्यान योग कार्यक्रम 30,31जनवरी और 1 फरवरी 2026 तक हुआ है।
सिद्धार्थ ध्यान योग में 2121 से ज्यादा जुड़े साधकों ने उमंग और उत्साह के साथ ध्यान,योग ,कीर्तन और सत्संग का आनंद लिया और आध्यात्मिक पथ पर चलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ।
आचार्य कुलदीप, आचार्य अनुपम,आचार्य गगन,आचार्य जितेंद्र और आचार्या मां साक्षी जी ने साधकों के कल्याण हेतु सुंदर सत्र लिए है।
समर्थगुरू धारा हरियाणा के संयोजक आचार्य सुभाष और टीम ने इस कार्यक्रम हेतु बहुत सुंदर व्यवस्था की थी। समर्थगुरु धाम मुरथल,सोनीपत के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने इस कार्यक्रम में साधकों को ओंकार दीक्षा प्रदान की गई।
समर्थगुरु धाम, मुरथल आश्रम में सुंदर आध्यात्मिक वातावरण है जिसका नेतृत्व समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी करते हैं।
परमगुरु ओशो को संपूर्णता से समझने के लिए पृथ्वी के बैकुंठ अध्यात्म की यूनिवर्सिटी समर्थगुरु धारा, मुरथल , हरियाणा में में सभी सच्चे प्यासे साधकों का हार्दिक स्वागत है।
आदरणीय समर्थगुरू जी अपने प्रवचनों में बताते है कि
मानो मत स्वयं जानो। स्वयं का अनुभव बहुत आवश्यक है।
प्रथम तल के कार्यक्रम सिद्धार्थ ध्यान योग में समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी की कृपा से प्रसाद स्वरूप सभी शिष्यों को ओंकार दीक्षा प्रदान की जाती है। जिससे आध्यात्मिक पथ प्रारंभ होता है। सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी ने भी नाम की महिमा गाई है :
“नानक नाम जहाज है,
चढ़े सो उतरे पार ,
जो श्रद्धा कर सेंवदे,
गुर पार उतारणहार। “
सनातन धर्म में जीवित सदगुरू की ही मुख्य भूमिका होती है। भगवान की जब कृपा होती है तो पूर्ण सदगुरु मिलते है और पूर्ण सदगुरु की कृपा होती है तो भगवान मिलते है।
संत कबीरदास जी ने भी गुरु की महिमा का बखान किया है।
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
परमगुरु ओशो ने अपने प्रवचनों में कहा है कि मेरे जाने के बाद सच्चे शिष्य वही है जो जीवित सदगुरू के सान्निध्य में ही आध्यात्मिक यात्रा करते है। समर्थगुरू धारा आनंद और उत्सव की गंगा की तरह पावन धारा है। जिसमें 28 कार्यक्रम साधकों को आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान और संतत्व पथ हेतु बनाए गए है। संसार के सभी वर्ग हेतु प्रज्ञा, विवेक और आनन्द पूर्वक जीवन जीने के लिए विशेष 40 प्रज्ञा कार्यक्रम की बहुत सुंदर रचना की गई है। जिसे सभी सच्चे साधक अपने मित्र और परिवार सहित ऑनलाइन और ऑफलाइन अपने समयानुसार कर सकते है।

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