
कुवि में ‘विभाजन विभीषका’ पर विशेष व्याख्यान आयोजित।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 13 अगस्त : भारत विभाजन केवल जमीन का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह लाखों लोगों के जीवन, रिश्तों और अस्मिता की त्रासदी थी। विशेष रूप से महिलाओं ने अपहरण, हिंसा, बलात्कार और विस्थापन की भयावह पीड़ा झेली। विभाजन के दौरान भूख, प्यास, हिंसा और विस्थापन ने लोगों की मानसिक स्थिति तक को प्रभावित किया। अनेक परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और अपना घर-बार छोड़कर नए स्थानों पर जीवन शुरू किया। विभाजन की स्मृतियां हमें यह सिखाती हैं कि नफरत और हिंसा का सबसे बड़ा नुकसान आम इंसान को होता है। इसलिए हमें इतिहास से सीख लेकर शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। यह उद्गार कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय की ओर से कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर गुरुवार को सीनेट हॉल में ‘विभाजन विभीषिका’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए। इससे पहले छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि विभाजन की स्मृतियां हमें आपसी भाईचारे, शांति और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देती हैं। युवा पीढ़ी को इतिहास से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाजन की हिंसा में हत्या, लूट, आगजनी, अपहरण, महिलाओं पर अत्याचार और बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ। मंटो, अमृता प्रीतम, भीष्म साहनी और इंतज़ार हुसैन जैसे साहित्यकारों ने इस पीड़ा को अपनी रचनाओं में दर्ज किया। विभाजन का इतिहास हमें नफरत नहीं, बल्कि जागरूकता, मानवीय संवेदना और सामाजिक एकता की सीख देता है। राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को मानसिक, शारीरिक और संगठनात्मक रूप से सुदृढ़ होना आवश्यक है।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि विभाजन विभीषिका दिवस हमें 1947 की त्रासदी को स्मरण कराने के साथ-साथ इतिहास से सीख लेने का अवसर देता है। राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को मानसिक, शारीरिक और संगठनात्मक रूप से सुदृढ़ होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे एक-दूसरे के सहयोग के लिए संगठित रहें और अपनी संस्कृति, इतिहास एवं विरासत के प्रति आत्मविश्वास रखें। प्रो. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभाजन विभीषिका दिवस के पुनः स्मरण की पहल का उद्देश्य भी नई पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।
डॉ. अम्बेडकर अध्ययन संस्थान के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने अपनी कविता के माध्यम से कहा कि विभाजन की पीड़ा, खोए हुए भारत और राष्ट्रीय एकता के संकल्प के रूप में देखने का संदेश देता है। इसमें राष्ट्र की अखंडता, विभाजन के विस्थापितों की पीड़ा और भविष्य के भारत के निर्माण का आह्वान है। एकजुटता ही ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने का सबसे मजबूत आधार है।
कुटा प्रधान डॉ. जितेन्द्र खटकड़ ने कहा कि विभाजन की त्रासदी ने लाखों लोगों से उनके परिवार, घर, जमीन, रोजगार और पुश्तैनी पहचान छीन ली। उस दौर में ट्रेनें भी पीड़ा और भय का प्रतीक बन गई थीं। इस त्रासदी को महसूस करने वालों की वेदना की कल्पना करना भी कठिन है। उन्होंने कहा कि हमें अपने इतिहास को कभी नहीं भूलना चाहिए और विभाजन की पीड़ा से सीख लेते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता, शांति, सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।
कुंटिया प्रधान राजवंत कौर ने कहा कि विभाजन और स्वतंत्रता के इतिहास को याद रखना, सैनिकों के बलिदान का सम्मान करना और अपने-अपने कार्य को ईमानदारी से करना ही सच्ची देशभक्ति है। मंच का संचालन डॉ. निधि माथुर ने किया।
इस अवसर पर प्रो. आरके मोदगिल, प्राचार्या प्रो. रीटा, प्रो. कुसुमलता, डॉ. प्रीतम सिंह, प्रो. परमेश कुमार, कुटा प्रधान डॉ. जितेन्द्र खटकड़, डॉ. विकास पोपली, डॉ. हरविंदर लोंगोवाल, उपासना सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे।


