रायबरेली- तीन ब्लॉकों के गांवों तक पहुंची टीबी की जांच, हैंडहेल्ड एक्स-रे से 1,017 लोगों की स्क्रीनिंग

रिपोर्टर विपिन राजपूत

तीन ब्लॉकों के गांवों तक पहुंची टीबी की जांच, हैंडहेल्ड एक्स-रे से 1,017 लोगों की स्क्रीनिंग
एक से छह अगस्त तक विशेष अभियान में पाँच मरीजों में टीबी की पुष्टि

रायबरेली , 8 अगस्त 2026।
टीबी के सक्रिय मामलों की जल्द पहचान और समय पर उपचार शुरू कराने के उद्देश्य से महराजगंज, ऊंचाहार और सरेनी ब्लॉक में हैंडहेल्ड एक्स-रे के माध्यम से विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। एक अगस्त से इन ब्लॉकों के विभिन्न गांवों में कैंप लगाकर लोगों की जांच की जा रही है। स्क्रीनिंग के दौरान टीबी के संदिग्ध और संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि छह अगस्त तक महराजगंज, ऊंचाहार और सरेनी टीबी यूनिटों में कुल 1,017 लोगों की हैंडहेल्ड एक्स-रे से स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 651 लोगों में टीबी की आशंका पाई गई, जबकि आगे की जांच में पांच मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है।
महराजगंज टीबी यूनिट में 139 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें पांच लोग टीबी के संदिग्ध पाए गए। इनमें अभी तक किसी मरीज में टीबी की पुष्टि नहीं हुई है।
ऊंचाहार टीबी यूनिट में 305 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 282 लोगों में टीबी की आशंका पाई गई, जबकि आगे की जांच में चार मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई।
इसी तरह सरेनी टीबी यूनिट में 573 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 364 लोग संभावित टीबी मरीज पाए गए और आगे की जांच में एक व्यक्ति में टीबी की पुष्टि हुई।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में भी टीबी की शुरुआती पहचान में मदद मिल रही है, जहां लोगों के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल होता है। कैंप के दौरान स्क्रीनिंग के साथ लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
गांवों में जागरूकता के साथ बढ़ाई जा रही सामुदायिक सहभागिता
उपजिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. शम्स रिजवान ने बताया कि अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर टीबी के संभावित मामलों की पहचान करना और पुष्टि होने पर मरीजों को जल्द उपचार से जोड़ना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, लगातार बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना या भूख कम लगना जैसे लक्षण होने पर टीबी की जांच जरूर कराएं। समय पर जांच और पूरा उपचार टीबी के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सम्बंधित टीयू के वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक वरुण देव, मैसूर आलम, प्रदीप कुमार तथा वरिष्ठ लैब पर्यवेक्षक सुनीत कुमार श्रीवास्तव संतोष कुमार, शुभम के सहयोग से अगस्त माह में अब तक 5 टीबी के मरीज पाए गए। जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना ने बताया कि अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां की जा रही हैं। लोगों को स्क्रीनिंग कैंप तक पहुंचाने के लिए गांवों में डुगडुगी के माध्यम से सूचना दी जा रही है और ग्राम प्रधानों का सहयोग लिया जा रहा है। ग्राम प्रधानों और स्थानीय स्तर के अन्य प्रभावशाली लोगों के माध्यम से ग्रामीणों को टीबी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक संभावित मरीजों की समय पर पहचान हो सके।

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