श्रीरामकृष्ण कुंज में हुआ गौड़ीय वैष्णव आचार्य श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती द्वारा रचित “श्रीस्तवामृत लहरी” ग्रंथ का विमोचन

सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
ब्यूरो चीफ – डॉ. गोपाल चतुर्वेदी।

वृन्दावन, 11 अगस्त : रमण रेती (सुनरख रोड़) स्थित श्रीरामकृष्ण कुंज में
गौड़ीय वैष्णव आचार्य श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती रचित “श्रीस्तवामृत लहरी” ग्रंथ का विमोचन विभिन्न सन्तों, विद्वानों व धर्माचार्यों की पावन सानिध्य में अत्यन्त हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ हुआ।
विमोचन समारोह में श्रीपीपापीठाधीश्वर जगद्गुरु बाबा बलराम दास देवाचार्य महाराज, चंद्रोदय मंदिर के प्रमुख अनंतवीर दास महाराज, प्रमुख समाजसेवी एवं इतिहासकार पं कपिल उपाध्याय, धर्मरक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़, भागवताचार्य अशोक शास्त्री, प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, हरिप्रिय दास, केशवदेव, श्यामसुंदर दास, दासाभास डॉ. गिरिराज , कालीचरण सिंह, डॉ. राधाकांत शर्मा, हेमांग दास आदि ने समवेत रूप से इस ग्रंथ का विमोचन किया।
ज्ञात हो कि विश्वनाथ चक्रवर्ती पाद रचित “श्री स्तवामृत लहरी” ग्रंथ का हिंदी भाषा में विश्व में प्रथम बार प्रकाशन हुआ है।इस ग्रन्थ का बंगला भाषा से हिंदी में अनुवाद डॉ. भागवत श्यामदास ने किया।
उन्होंने बताया कि पूज्य पिताजी ब्रजविभूति श्यामदास द्वारा पूर्व में लगभग सवा सौ ग्रंथों का अनुवाद उन पर टीका और उनका प्रकाशन किया जा चुका है। यह सब प्रकाशन एक अव्यावसायिक संस्थान श्री हरिनाम संकीर्तन मंडल के द्वारा किया जाता है और ग्रंथ विक्रय से प्राप्त होने वाले एक-एक रुपये की राशि पुनः ग्रंथ प्रकाशन में व्यय की जाती है। यह किसी की आजीविका का साधन नहीं है वरन ग्रंथ प्रचार का एक संकल्प है,जिसे वे पूरा कर रहे हैं। इस ग्रंथ में निकुंज लीला के बड़े मनोहर विशुद्ध भक्ति परक और निकुंज लीला के 28 स्तव हैं।जो अब तक देवनागरी लिपि में अनुपलब्ध थे।
कथा व्यास डॉ.
अच्युत लाल भट्ट ने बताया की गौड़ीय संप्रदाय में स्तव लेखन की परंपरा बहुत ही प्राचीन है।सभी षडगोस्वामियों के द्वारा रचित ऐसे स्तव ग्रंथ उपलब्ध होते हैं। यह सौभाग्य की बात है कि इन अनुपलब्ध ग्रंथों का हिंदी में प्रकाशन श्रीहरिनाम संकीर्तन मंडल के द्वारा किया जा रहा है।
श्रीपीपापीठाधीश्वर जगद्गुरु बाबा बलराम दास देवाचार्य महाराज एवं चंद्रोदय मंदिर के प्रमुख अनंतवीर दास महाराज ने कहा कि प्राचीन ग्रंथ अति महत्वपूर्ण हैं। इनका संरक्षण और प्रकाशन साक्षात भगवान की सेवा है।
प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि हरिनाम प्रेस से विगत 60 वर्षों से धार्मिक ग्रंथ प्रकाशित किये जा रहे हैं। जो बहुत महत्व की बात है। इन आध्यात्मिक और भक्ति ग्रंथों का प्रकाशन सनातन धर्म की रक्षा हेतु एक आवश्यक प्रकल्प है।
इस अवसर पर साध्वी ज्योत्स्ना दीदी, राधिका, श्रुति, श्रेया, अनुपमा, दीपक दास, रामहंस दास, गोपाल दास, पुंडरीक दास, सूत्रधार शिवा, राधेश्याम दास बाबा, सनत बाबा, हरिशरण दास, डॉ. खेडेकर, शांतनु, विजय कुमार आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
दासाभास गिरिराज ने सभी अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया और धन्यवाद ज्ञापन किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. भागवत श्यामदास ने किया।

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