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“कौशल-उन्मुख पर्यावरण शिक्षा से ही संभव है सतत विकासः कुलसचिव लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल”

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पर्यावरण एवं सतत विकास पर पाँच दिवसीय उद्योग-संबद्ध कौशल-आधारित कार्यशाला का सफल समापन।

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 7 फरवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास की दिशा में युवाओं को व्यावहारिक एवं उद्योग-संबद्ध कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान, द्वारा कौशल विकास केंद्र तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय उद्योग-संबद्ध कौशल-आधारित कार्यशाला का गुरुवार को वेलेडिक्ट्री (समापन) समारोह के साथ सफलतापूर्वक समापन हो गया।
इस अवसर पर आयोजित वेलेडिक्ट्री समारोह की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल ने मुख्य अतिथि के रूप में की। अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. वीरेंद्र पाल ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता क्षरण जैसी वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए कौशल-उन्मुख एवं व्यावहारिक पर्यावरण शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “पृथ्वी हमारी माता है और इसका संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्यता है।” उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे सतत विकास के सिद्धांतों को अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में अपनाएं तथा भारतीय परंपरागत पर्यावरणीय दृष्टिकोणों को पुनर्जीवित कर आधुनिक तकनीक से जोड़ें।
समारोह में कौशल विकास केंद्र के समन्वयक प्रो. तेजिंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने विश्वविद्यालय में इस प्रकार की उद्योग-संबद्ध कार्यशालाओं के नियमित आयोजन पर बल देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों की रोजगार-क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है और वे उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं को समझ पाते हैं। कार्यशाला के दौरान आयोजित विशेषज्ञ शैक्षणिक एवं तकनीकी सत्रों में विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योगों एवं कंसल्टेंसी से जुड़े 10 संसाधन व्यक्तियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से कुल 85 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. अनुराधा ने पर्यावरणीय अनुपालन विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने वैधानिक पर्यावरणीय कानूनों, पर्यावरण प्रभाव आकलन, नियामक स्वीकृति प्रक्रियाओं, अनुपालन निगरानी तथा प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. हरदीप राय शर्मा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान की तथा अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान और पुनर्चक्रण के महत्व को रेखांकित किया।
पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने कहा कि इस प्रकार के उद्योग-संबद्ध एवं कौशल-आधारित कार्यक्रम विद्यार्थियों को पर्यावरण क्षेत्र में करियर के लिए तैयार करने में सहायक सिद्ध होते हैं और उन्हें व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। कार्यशाला समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पाँच दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने सभी संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। वेलेडिक्ट्री समारोह का समापन डॉ. पूजा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. कुसुमलता, डॉ. रीता दहिया, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. दीप्ति, डॉ. अंजलि, इंजीनियर नीतिका एवं इंजीनियर शिवानी सहित अन्य शिक्षकगण एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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