
विभाजन विभीषिका, स्वतंत्रता का धुंधला एवं पीड़ादायक पक्ष’ — मसुविवि में ‘भारत विभाजन 1947’ पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित
आजमगढ़। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा ‘भारत विभाजन 1947: राजनीति, राष्ट्रवाद और मानवीय त्रासदी’ विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 1947 के विभाजन की राजनीतिक पृष्ठभूमि, राष्ट्रवाद और उसके कारण उत्पन्न मानवीय त्रासदी को समझते हुए नई पीढ़ी को ऐतिहासिक अनुभवों से सीख लेने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की। पूरे कार्यक्रम का कुशल संयोजन राजनीति विज्ञान विभाग के शिक्षक सूर्य प्रकाश अग्रहरि द्वारा किया गया, जबकि मंच का सफल संचालन छात्रा प्रतिष्ठा चतुर्वेदी ने किया।
प्रमुख वक्ताओं के विचार:
- प्रो. मानुका खन्ना (पूर्व कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय – मुख्य वक्ता): प्रो. खन्ना ने कहा कि विभाजन को केवल राजनीतिक सीमाओं के पुनर्निर्धारण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े व्यापक सामाजिक एवं मानवीय अनुभवों के संदर्भ में समझना जरूरी है। उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों और राष्ट्रवाद के बदलते स्वरूप पर भी अपने विचार साझा किए।
- डॉ. मुनेश कुमार (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ – विशिष्ट वक्ता): विभाजन के मानवीय पक्ष, विस्थापन और सामाजिक विघटन पर चर्चा करते हुए डॉ. मुनेश ने कहा— “विभाजन की त्रासदी को समझना इतिहास से सीख लेने का माध्यम है। इतिहास की दुखद घटनाओं का अध्ययन वर्तमान और भविष्य में सामाजिक सद्भाव, सहिष्णुता तथा मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।”


