भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हेतु कलमकारों के साथ बेटियों को भी आगे आना होगा-जिलाधिकारी

साहित्यकार व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं.लक्ष्मी नारायण मिश्र के विचार आज भी प्रासंगिक,
भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हेतु कलमकारों के साथ बेटियों को भी आगे आना होगा,
जिलाधिकारी
आजमगढ़। आज जिला एकीकरण समिति आजमगढ़ के एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वधान में आधुनिक हिंदी नाटक के जनक महाकाव्य के पुरोधा एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र जी की जयंती व स्मृति समारोह विगत वर्षों की तरह जनपद के हृदय में स्थित नगर पालिका परिषद आजमगढ़ तिराहे पर जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में भव्य तरीके से आयोजित की गयी ।
कार्यक्रम की शुरुआत नगर पालिका परिषद आजमगढ़ तिराहे पर स्थित पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र जी की प्रतिमा पर जनपद के मुखिया जिलाधिकारी रविंद्र कुमार जी एवं मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी ,उप जिलाधिकारी सदर आजमगढ़ व भारी संख्या में उपस्थित साहित्यकारप्रेमी , अधिवक्ता, बुद्धिजीवी वर्ग एवं पत्रकार बंधुओ ने माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
जिलाधिकारी श्री रविंद्र कुमार ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि आजमगढ़ जनपद ऋषि मुनियों और साहित्यकारों की धरती है यहां से कालजयी नाटककार, एकांकीकार व महाकवि तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र के साथ-साथ, प्रिय-प्रवास नाम से खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य लिखने वाले अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, वीर रस के प्रणेता और महान कवि पं. श्याम नारायण पांडेय अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा के जनक एवं प्रसिद्ध यायावर पं. राहुल सांकृत्यायन, शैदा जी एवं अल्लामा शिब्ली नोमानी की पवित्र धरा है। हम लोगों का सौभाग्य है कि हम लोग पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र जिनके विश्व स्तरीय काव्य, कालजयी नाटक एवं कहानी के साथ-साथ एकांकी पर मानो एकाधिकार रहा हो जैसे पुरोधा की 123 में जयंती मना रहे हैं ।जहां तक जिला प्रशासन का प्रश्न है यह उसके लिए सौभाग्य की बात है कि इतने बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जन्म शताब्दी मनाने का अवसर मिला। हलांकि पंडित मिश्र जी अविभाजित जनपद आजमगढ़ के मूल निवासी थे, वर्तमान में उनका ग्राम बस्ती मऊ जिले में पड़ता है । उनके नाटक सिंदूर की होली ,रासक्ष का मंदिर ,सन्यासी आदि के साथ-साथ लगभग 100 एकांकी जिसमें अशोक बन, प्रलय के पंख, मेड तोड़ दी आदि तथा काव्य के रूप में ना स्वर्ग में जाने की इच्छा , घास के घरौंदे, अर्थात यदि उन्हें हम संपूर्ण साहित्यकार कहे तो कोई अतिशयोक्ति न होगी ।उनके साहित्य तत्कालीन भ्रष्ट व्यवस्था का जीवंत उदाहरण था, अंग्रेजी हुकूमत द्वारा समाज के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण तथा भ्रष्टाचार पर बेटी के माध्यम से करारा प्रहार, निश्चय ही आज के समय भी उनके साहित्य की महत्ता बनी हुई है। हलाकि हम यह मानते हैं की काफी सुधार हुआ है परंतु अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में इनका अप्रतिम प्रयास शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, छायावाद के इस पुरोधा के लेखन का काल भी ऐसे समय में था जब देश का नौजवान स्वतंत्रता के लिए अंगड़ाई ले रहा था । 8 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भी कलमकार न सिर्फ लेखनी को गति दी अपितू प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता आहुति में अपना योगदान दिया। उनके साहित्य तत्कालीन समाज के साथ-साथ वर्तमान समाज के लिए भी काफी प्रेरणादायी होंगे हम मुख्य विकास अधिकारी/सचिव जिला एकीकरण समिति को तथा उनके पंडित जी के पौत्र आशुतोष मिश्रा जी को बधाई देते हैं कि इतने बड़े व्यक्तित्व की जयंती समारोह में आपने हमें आमंत्रित किया।
कार्यक्रम के अंत में पंडित जी के पौत्र श्री आशुतोष मिश्रा ने आए हुए अतिथियों को विशेष रूप से जिलाधिकारी महोदय, मुख्य विकास अधिकारी महोदय एवं जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, कलमकार एवं अधिवक्ता के साथ-साथ बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी श्री परीक्षित खटाना, वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमी जी, प्रो. वेद प्रकाश उपाध्याय, प्रो. इंद्रजीत, डॉ. गिरिजेश,डॉ.जयप्रकाश आदि के साथ-साथ वरिष्ठ अधिवक्ता शत्रुघ्न सिंह, प्रमोद सिंह सेंट्रल बार के मंत्री राणा अजेय सिंह, सिविल बार के पूर्व मंत्री जगदंबा पांडेय , ज्ञानचंद ज्ञानू जी, महुवारी तथा भारी संख्या में साहित्य प्रेमी ,अधिवक्ता, बुद्धिजीवी वर्ग, पत्रकार बंधु आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन महाराजा सुहेलदेव वि. वि. के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने किया।
डॉ. प्रवेश कुमार सिंह
मो. नं. 9452 4458 78




