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साक्षीत्व ही संतत्व है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया

कुरुक्षेत्र, (अमित) 20 जनवरी : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के पीठाधीश और समर्थगुरू मैत्री संघ हिमाचल के जोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने को गांव बिहौली, कुरुक्षेत्र में विशेष मा दुर्गा के विशेष संकीर्तन और भंडारे के पावन अवसर पर अंजू राणा धर्मपत्नी चेतन राणा के परिवार को आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया द्वारा रचित वात्सल्य प्रज्ञा पुस्तक भेंट की गई। गांव कराल माजरा के सुप्रसिद्ध भजन गायक सोमदत्त हुनर और उनकी जागरण मंडली ने मां दुर्गा और भगवान कृष्ण और खाटू श्याम बाबा के भजन गाए।
इस शुभ अवसर पर भक्त सुशील तलवाड़, निशा अरोड़ा,कोमल मेहरा,आशा कवात्रा और शिमला, निर्मला आदि के साथ सभी भक्तों ने मां दुर्गा की भेंटे गाई और सुन्दर नृत्य किया। वैदिक मंत्रों से मां दुर्गा की पूजा अर्चना और आरती करवाई। भजन गायक सोमदत्त हुनर को आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया द्वारा रचित पुस्तक दाम्पत्य प्रज्ञा भेंट की गई। डॉ. मिश्रा ने भगवान और सदगुरु के सद्गुणों का गुणगान किया और सभी का जीवन मंगलमय हो उसके लिए मां दुर्गा का ध्यान और सामूहिक प्रार्थना की। हम सभी को प्रेम और भक्ति से भगवान् का ध्यान और सुमिरन करना चाहिए।
समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी का सनातन धर्म में बहुत योगदान है। सनातन धर्म के मुख्य 4 आयाम है। अर्थ, धर्म , काम और मोक्ष।
धर्म चक्र कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रत्येक शनिवार को श्री सिद्धार्थ रामायण पर सत्संग आचार्य दर्शन जी और प्रत्येक रविवार को गोरख गीता पर आचार्य कुलदीप जी समर्थगुरू धारा लाइव यू ट्यूब चैनल पर जनमानस के कल्याण हेतु शाम 6 बजे से 7 बजे तक सत्संग करते है। ट्वीटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया ने बताया कि आत्म स्मरण साक्षी है। साक्षी का एक पैर भीतर परमात्मा में है और दूसरा पैर बाहर संसार में है। साक्षी का तादात्म्य निराकार से है और भ्रमण संसार में है। साक्षीत्व ही संतत्व है।

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