वंदे मातरम्–स्वर्णिम भारत विषय पर ब्रह्माकुमारीज का महिला दिवस समारोह आयोजित

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 9 मार्च : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज विश्व शांति धाम सेवा केंद्र में नारी शक्ति के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मिक जागरण के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “वंदे मातरम्–स्वर्णिम भारत” रहा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी गणमान्य महिलाओं ने भाग लेकर नारी की भूमिका और उसके महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा, डॉ. सुमन सेठी, डॉ. सुनीति, डॉ. भारद्वाज, डॉ. बिंदु गर्ग, डॉ दीप्ति,पार्षद रेखा शर्मा, हिंदू शिक्षा समिति की पूर्व उपाध्यक्ष राजविज, समाजसेविका एवं कवयित्री गायत्री कौशल, पूनम (नारी जागरूक रोजगार संस्था), सुमन (महिला पुलिस स्टेशन), सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन, ब्रह्माकुमारी राधा बहन तथा ब्रह्माकुमारी मधु बहन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। बी.के. पुष्पा बहन एवं आरती बहन ने अतिथियों को पटका पहनाकर तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर भारतीय संस्कृति की “अतिथि देवो भव” परंपरा का निर्वाह किया। कार्यक्रम का संचालन बी.के. मधु बहन ने करते हुए मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया तथा ब्रह्माकुमारी संस्था की सेवाओं पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि डॉ. मंजू शर्मा ने महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक नारा नहीं बल्कि देश के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना है। जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक होंगी तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बनेगा तथा स्वर्णिम भारत की स्थापना संभव होगी।” उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार और समाज की मजबूत आधारशिला हैं और उनके सशक्त होने से ही राष्ट्र की उन्नति संभव है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनीति ने कहा कि आज नारी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही है और परिवार तथा समाज को संतुलित रूप से संभाल रही है। उन्होंने कहा कि नारी की प्रगति के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी आवश्यक है, क्योंकि आध्यात्मिकता से ही जीवन में शांति और संतुलन आता है।
डॉ. सुमन सेठी ने कहा कि नारी प्रेम, करुणा, सहनशीलता, क्षमा और सृजन की अद्भुत शक्ति से संपन्न है। उन्होंने कहा कि नारी को सशक्त बनाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि उसके अंदर निहित शक्तियों को पहचानने और उन्हें सही दिशा देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान कुमारी गौरी ने स्वागत गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। बी.के. पुष्पा बहन ने कविता के माध्यम से नारी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। वहीं निशा, पूजा, तन्वी, राजकुमार, हीरा और ममता दुआ ने “जिंदगी बने आसान” शीर्षक लघु नाटिका के माध्यम से सकारात्मक सोच और पारिवारिक समरसता का संदेश दिया।
बी. के. मधु बहन ने उपस्थित सभी को राजयोग मेडिटेशन की अनुभूति कराते हुए कहा कि “नारी अबला नहीं बल्कि विश्व परिवर्तन की शक्ति है। जब नारी अपने आत्मिक स्वरूप को पहचानती है, तब वह स्वयं भी सशक्त बनती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनती है।”
सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था वर्ष 1937 से आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से मानव सशक्तिकरण का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नारी नम्रता, धैर्य, सहनशीलता और त्याग की प्रतिमूर्ति है तथा स्वर्णिम भारत के निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
समाजसेविका एवं कवयित्री गायत्री कौशल ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था ने नारी शक्ति को सम्मान और नेतृत्व प्रदान कर महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और मेडिटेशन से व्यक्ति के विचार सकारात्मक बनते हैं और जीवन में सही दिशा मिलती है।
कार्यक्रम के अंत में बी. के. डॉ. प्रवीण महाजन ने सभी अतिथियों तथा उपस्थित माताओं-बहनों का आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन द्वारा अतिथियों को ईश्वरीय सौगात एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में माताओं-बहनों की उपस्थिति रही।



