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हकीम अजमल खान महान चिकित्सक ही नहीं, दूरदर्शी राष्ट्रभक्त भी थे : कुलपति प्रो. धीमान

आयुष विश्वविद्यालय में मनाया गया विश्व यूनानी दिवस कार्यक्रम।

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक)11 फरवरी : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि हकीम अजमल खान केवल एक प्रख्यात हकीम ही नहीं थे, बल्कि वे दूरदर्शी राजनीतिज्ञ और सच्चे देशभक्त भी थे। उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कुलपति बुधवार को विश्वविद्यालय के यूनानी चिकित्सा केंद्र द्वारा आयोजित विश्व यूनानी दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
कुलपति प्रो. धीमान ने कहा कि हकीम अजमल खान आयुर्वेद के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे और भारतीय चिकित्सा परंपराओं के समन्वय के पक्षधर थे। यूनानी चिकित्सा पद्धति का विकास भी भारतीय ज्ञान परंपराओं से प्रभावित रहा है। भारत की धरती ने सदैव विभिन्न चिकित्सा और ज्ञान प्रणालियों को स्वीकार कर उन्हें समृद्ध किया है। यही समन्वित दृष्टिकोण आज की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आयुष पद्धतियों आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और योग के बीच समन्वय स्थापित कर ही देश में समग्र स्वास्थ्य मॉडल विकसित किया जा सकता है। विश्वविद्यालय इस दिशा में शिक्षा, शोध और चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यूनानी चिकित्सा प्रणाली का इतिहास गौरवशाली रहा है और इसे वैज्ञानिक आधार के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज भी जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान हकीम अफरार अहमद ने हकीम अजमल खान के जीवन, योगदान और यूनानी चिकित्सा पद्धति के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नेहा लांबा, डॉ. कुलजीत कौर, डॉ. चक्रपाणि आर्य, डॉ. रिया शर्मा, डॉ. निर्मला देवी सहित अन्य चिकित्सक, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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