लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के पशुचिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग में 38वें आईसीएआर सेंटर ऑफ एडवांस फैकल्टी ट्रेनिंग का विधिवत उद्घाटन

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
ब्यूरो चीफ – डॉ. संजीव कुमारी।
हिसार, 8 फरवरी : इस 21 दिवसीय पाठ्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए वैज्ञानिकों को “पशु रोगों के निदान और नियंत्रण में नवीन प्रगति” विषय पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम का आयोजन लुवास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. (प्रोफेसर) विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में किया जा रहा है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि पशुपालकों को बेहतर पशु उत्पाद प्राप्त करने तथा उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए पशुओं एवं कुक्कुट में होने वाली बीमारियों के निदान की आधुनिक एवं उन्नत तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण भारत में पशुओं में भविष्य में संभावित रोग प्रकोप से पूर्व तैयारी, पशुधन स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है और वर्तमान समय की आवश्यकता भी है। उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी एवं इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान गतिविधियों में निरंतर उत्कृष्टता के लिए पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सराहना की।
पशुचिकित्सा महाविद्यालय, लुवास के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार रोज़ ने पाठ्यक्रम के प्रारूप को तैयार करने के लिए पाठ्यक्रम निदेशक एवं समन्वयकों को बधाई दी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा आयोजकों की ओर से तैयार ‘प्रशिक्षण पुस्तिका’ का विमोचन भी किया गया।
विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. राजेश छाबड़ा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विभाग के गौरवशाली इतिहास, अनुसंधान, शिक्षण, विस्तार तथा मानव संसाधन विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों के कौशल में वृद्धि करना है, जिसके अंतर्गत प्रशिक्षुओं को प्रायोगिक प्रशिक्षण के साथ-साथ देश के प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान भी प्रदान किए जाएंगे।
पाठ्यक्रम संयोजक डॉ. अखिल कुमार गुप्ता और डॉ. महावीर सिंह ने जानकारी दी कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के सात राज्यों से कुल 16 वैज्ञानिकों एवं प्राध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। देश के विभिन्न भागों से आमंत्रित विशेषज्ञ पशुधन की बीमारियों, उनके निदान तथा बचाव के नवीनतम उपायों पर अपने व्याख्यान देंगे। प्रशिक्षणार्थियों को विषय से संबंधित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया जाएगा। यह पाठ्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित है।
समारोह में विश्वविद्यालय के अनेक अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. गौतम, वित्त नियंत्रक डॉ. विकास खरब, वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार कक्कड़, डॉ. स्वाति दहिया, डॉ. अंशुल लाठर, डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. संजीवना, डॉ. अनीता दलाल सहित विभाग के छात्र भी मौजूद रहे।
अंत में कोर्स समन्वयक डॉ. महावीर सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. निलेश सिंधु ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करते हैं तथा विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को सशक्त बनाते हैं।




