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आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और पद समाप्ति के निर्णय पर विवाद

आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और पद समाप्ति के निर्णय पर विवाद

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक

कुरुक्षेत्र, 21 मई : श्री कृष्णा आयुर्वेद वेलफेयर एसोसिएशन ने श्री कृष्णा आयुर्वेद विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के प्रशासन द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों (AMO) के लिए की गई आपत्तिजनक टिप्पणी और 17 पदों को समाप्त करने के निर्णय की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शर्मा ने कुलपति को लिखे पत्र में इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई है। विश्वविद्यालय ने ई.सी. एजेंडा आइटम नंबर 16.10 के तहत 17 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी पदों को समाप्त कर सीनियर रेजिडेंट पदों में परिवर्तित करने का फैसला लिया है जिसमें AMO को “सुस्त” (lethargic) बताकर उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाया गया है। एसोसिएशन ने इसे अपमानजनक और शर्मनाक करार देते हुए तत्काल सुधार की मांग की है। 20 मई 2025 शाम को आयोजित एक ऑनलाइन मीटिंग में 78 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों ने इस निर्णय की सर्वसम्मति से निंदा की और इसे अन्यायपूर्ण बताया। डॉ. पंकज कौशिक ने बताया कि एसोसिएशन ने मांग की है कि “सुस्त” शब्द को हटाकर खेद प्रकट किया जाए, पद समाप्ति का निर्णय रद्द किया जाए, और इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए बैठक बुलाई जाए। एसोसिएशन ने इस निर्णय को आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका बताया है, क्योंकि इससे न केवल रोजगार के अवसर कम होंगे, बल्कि आयुर्वेदिक शिक्षा और प्रशिक्षण लेने वाले छात्रों का मनोबल भी टूटेगा। डॉ सुमित बेरवाल ने चिंता जताई कि इस तरह के फैसले आयुर्वेद को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने की दिशा में चल रहे प्रयासों को कमजोर करेंगे। गौरतलब है कि पिछले 50 वर्षो से आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों ने इस अस्पताल के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य, विश्विद्यालय के शिक्षक, हरियाणा के विभिन्न जिलों के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, वतर्मान आयुष निदेशक, ccras के महानिदेशक जैसे प्रमुख व्यक्ति भी आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी पारंपरिक चिकित्सा के माध्यम से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं, स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ बनाते हैं। ये अधिकारी निवारक स्वास्थ्य देखभाल और प्राकृतिक उपचार के जरिए समुदायों को सशक्त बनाते हैं। हाल ही में हरियाणा सरकार ने 529 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिसमें कुरुक्षेत्र में 28 पद शामिल थे। यह कदम आयुर्वेद को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनीय था, लेकिन विश्वविद्यालय का ताजा निर्णय आयुर्वेदिक पेशेवरों के रोजगार अवसरों को कम कर सकता है। सरकार की इस पहल ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दिखाई, लेकिन विश्वविद्यालय के फैसले ने इस दिशा में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस बैठक में डॉ. विनीत वर्मा, डॉ. कृष्ण सिसोदिया, डॉ. शिल्पा मनचंदा, डॉ. सुमन शर्मा, डॉ. जितेन्द्र गिल, डॉ. सुमित बेरवाल, डॉ. हेमंत, डॉ. गोपाल यादव, डॉ. शम्भू दयाल, डॉ. राजेश मोहन, डॉ. अनिल, डॉ. रंजना, डॉ. राजगुरु, डॉ. अक्षय, डॉ. चेतना, डॉ. रेखा रानी, डॉ. कीर्ति चौधरी, डॉ. जितेश सैनी, डॉ. रोहित शर्मा, डॉ. पूनम वर्मा, डॉ. किरण, डॉ. मोहित, डॉ. पंकज अत्रि, डॉ. विक्रम, सहित अन्य आयुर्वेदिक चिकित्सक जुड़े।

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