श्री शिर्डी साईं सर्व देव मंदिर के महंत पं. सुशील पाठक के न्यौते पर मंदिर पहुंचे अन्तर्राष्ट्रीय सिद्ध संत बाबा नीम करौरी महाराज

दीपक शर्मा (जिला संवाददाता)

बरेली : श्री शिर्डी साईं सर्व देव मंदिर के महंत पं सुशील पाठक जी के न्यौते पर मंदिर पहुंचा।।आज एक विशेष दिन इस मंदिर में मनाया गया, क्योंकि आज आधुनिक भारत के अन्तर्राष्ट्रीय सिद्ध संत बाबा नीम करौरी महाराज मंदिर में पधारे अर्थात उनके श्री विग्रह की पुनीत प्राण प्रतिष्ठा भव्य ढंग से की गयी और भोग प्रसाद वितरित किया गया।। अनेकों श्रृद्धालु इस अवसर पर उपस्थित रहे और विशेष बात यह थी कि इस प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीम करौरी धाम के महंत पर्यावरणीय श्री त्यागी जी थे जो सुशील पाठक जी विशेष अनुरोध पर पधारे।भजन मंडली ने बहुत सुंदर भजनों को गाकर श्री हनुमान जी,श्री राम जी तथा नीब करौरी बाबा का गुणगान कर माहौल को भावुक और रस मय कर दिया।
इस अवसर पर बोलते हुए नीम करौरी से पधारे महाराज जी ने बहुत सुंदर बातें कही। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोक व्यवस्था को हर श्रेणी का अधिकारी और कर्मचारी चलाता है , ठीक इसी तरह पारमार्थिक व्यवस्था को ब्रह्म चलाते हैं। अनेकों देवी देवता उनके नियमों और आदेशों का अक्षर स: पालन करते हैं और कर्म विपाक में बंधी सृष्टि गति करती है।उस व्यवस्था को समझना प्रत्येक विवेक वान व्यक्ति का पारमार्थिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि श्री हनुमान जी इस व्यवस्था के प्रमुख पार्षद हैं और उनकी आज्ञा के बिना आप पारमार्थिक मंडल में कतयी प्रवेश नहीं कर सकते। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।
श्री बाबा नीम करौरी महाराज इन्हीं हनुमान जी के लाडले दूत और सिद्ध अवतार हैं।।नीम करौरी धाम की महिमा का भी उन्होंने ज्ञान प्रदान किया।
इस अवसर पर बरेली कालेज के प्रो 0 एसी त्रिपाठी ने नीब करौरी महाराज को आधुनिक भारत का सर्वश्रेष्ठ गृहस्थ सिद्ध संत और हनुमान जी के अवतार बताते हुए उनकी महिमा का गुणगान किया और दो अनूठे किस्से सुनाए।। उन्होंने कहा कि भारत की पारमार्थिक तत्वता को संदेह की दृष्टि से देखने वाले पश्चिमी समाज को भी बाबा श्री ने अंतर आंखें प्रदान की।हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ख्यातनाम मनोवैज्ञानिक और प्रोफेसर रिचर्ड एलपरेट जिन्होंने भारतीय आध्यात्म को मन की एक दशा और कल्पना समझा और शरीर में जबरदस्त ड्रग्स का परिणाम बताया तो इसी शोध के तहत भारत पहुंचने पर जब बाबा नीम करौरी से मुलाकात की और बाबा का रिचर्ड की जेब में रखे पचीसो एवं एस डी की गोलियां फांक कर बिल्कुल सामान्य रहने की महिमा दिखाई तो मनोवैज्ञानिक का कायाकल्प हो गया और वो बाबा के ऐसे सधन डिवोटी हुए कि पाश्चात्य जगत से हजारों लोग बाबा नीम करौरी की शरण में आने लगे और यह सिलसिला आज भी कैंची धाम में देखा जा सकता है। बाबा ने रिचर्ड एलपरेट को रामदास नाम दिया और राम दास ने बाबा पर कयी किताबें लिखीं।
एक घटना और जिक्र करते हुए प्रो तिरपाठी ने कहा कि समर्थ सदगुरु की शक्ति का अंदाजा ‌लगाने की क्षमता सामान्य मनुष्य में नहीं है। अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए बाबा मृत्यु के देवता से भी कैसे लड बैठे इसका रोचक जिक्र प्रो तिरपाठी ने किया। प्रो0 त्रिपाठी ने महन्त सुशील पाठक को इस सुअवसर पर आमंत्रित करने का अपने साथी प्रो 0 आनंद लखटकिया जी के साथ बहुत धन्यवाद भी दिया।

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