शुगर नियंत्रण सिर्फ फीकी चाय पीने से संभव नहीं,बल्कि जीवनशैली में सुधार लाना अनिवार्य : डॉ. वशिष्ठ

श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर सेमिनार आयोजित।

कुरुक्षेत्र, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि आयुष विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र वशिष्ठ और विशिष्ट तिथि के रूप में स्वामी श्रद्धानंद आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सालय, गुरुकुल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देव आनंद ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुष विवि के कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान ने की।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता,चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. चक्रपाणि आर्य, प्रो. मनोज तंवर, प्रो. शीलत सिंगला,प्रो. आशु, प्रो. विदुषी त्यागी, प्रो. सीमा रानी, प्रो. सचिन शर्मा, प्रो. राजेंद्र चौधरी, प्रो. पी.सी. मंगल, डॉ. आशीष नंदन, डॉ. सत्येंद्र, डॉ. ममता राणा, डॉ. नेहा लंबा, होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. कुलजीत कौर समेत अन्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यतिथि डॉ. धर्मेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि मानव शरीर पांच तत्वों से निर्मित है और मृत्यु के बाद इन्हीं में विलीन होना है। आज भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण मनुष्य प्रकृति से दूर हो रहा है, जिसका प्रतिकूल असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए प्राकृतिक चिकित्सा सिद्धांतों की जानकारी देते हुए बताया कि सूर्य चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, उपवास और आहार चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा की आधारशिलाएं हैं।
डॉ.वशिष्ठ ने कहा कि हर 8वीं महिला थायराइड और पीसीओडी से ग्रस्त है। भारत मधुमेह का हब बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुगर नियंत्रण सिर्फ फीकी चाय पीने से संभव नहीं, बल्कि भोजन आदतों और जीवनशैली में सुधार लाना अनिवार्य है। देर रात भोजन को उन्होंने “अपनी मौत को निमंत्रण” देने जैसा बताया। वशिष्ठ ने कहा कि 90% रोग प्राकृतिक तरीकों से ठीक हो जाते हैं, जिसमें 6% भूमिका चिकित्सक और 4% औषधि की होती है।
प्राकृतिक चिकित्सा इलाज नहीं, बल्कि जीवनशैली: डॉ. देव आनंद।
विशिष्ट अतिथि डॉ. देव आनंद ने कहा कि रोगी को ‘रोगी’ कहना उचित नहीं, बल्कि उसे स्वास्थ्य साधक कहा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में देश-विदेश से लोग प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ लेने आ रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में अभी भी जागरूकता की कमी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा कोई दवा आधारित चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ रहने की जीवनशैली है। बिना दवा के उपचार संभव है और इसके परिणाम स्थायी होते हैं।
आयुर्वेद का आधा हिस्सा प्राकृतिक चिकित्सा: कुलपति प्रो. धीमान।
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद का बड़ा आधार प्राकृतिक चिकित्सा है। कुलपति ने विद्यार्थियों को प्राकृतिक आहार अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि श्रेष्ठ चिकित्सक वही है जो आहार से उपचार कर सके। कुलपति ने कहा कि श्रेष्ठ चिकित्सक वही है जो दवाइयों से पहले आहार और जीवनशैली के माध्यम से रोग का उपचार कर सके। उन्होंने विद्यार्थियों से प्राकृतिक चिकित्सा को आयुर्वेद का अभिन्न अंग मानते हुए इसके सिद्धांतों का गहन अध्ययन करने और समाज में जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।

VV NEWS

राष्ट्रीय कार्यालय रमाकान्त पाण्डेय(गोपालपुरी) संरक्षक/संस्थापक ग्राम व पोस्ट- गोपालपुर (टावर) थाना व तहसील- मेहनगर जिला-आजमगढ़, उत्तर प्रदेश पिंन कोड़-276204 मोबाईल-9838825561,7054825561 हेंड कार्यालय/प्रशासनिक कार्यालय जितेंद्र पटेल (प्रमुख संपादक/प्रशासनिक संपादक) ग्राम व पोस्ट- 495668 थाना व तहसील-जांजगीर जिला-जांजगीर (छत्तीसगढ) पिंन कोड़-495668 मोबाईल-6265564514

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सदर विधानसभा में सरदार पटेल की जयंती पर भव्य रन फॉर यूनिटी का आयोजन

Wed Nov 19 , 2025
रायबरेलीरिपोर्टर विपिन राजकोट सदर विधानसभा में सरदार पटेल की जयंती पर भव्य रन फॉर यूनिटी का आयोजन रायबरेली 19 नवंबर 2025सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती अवसर पर सदर विधानसभा रायबरेली में भव्य रन फॉर यूनिटी का आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। सदर विधायक अदिति सिंह के […]

You May Like

Breaking News

advertisement