गीता केवल ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय प्रबंधन का पुराना माडल : राजनाथ सिंह

गीता का ज्ञान भारत के लिए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिएः राजनाथ सिंह।
आपरेशन सिंदूर भारत की आत्म सम्मान की उद्घोषणाः राजनाथ सिंह।
विश्व को गीता का अनुसरण करने की आवश्यकता: स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज।
निस्वार्थ कर्म का संदेश देती है गीताः प्रो. सोमनाथ सचदेवा।
कुवि में अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन 2025 का हुआ शुभारंभ।
कुरुक्षेत्र, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक 24 नवम्बर : भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गीता का संदेश केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व का ग्रंथ है। गीता ने हम सभी के जीवन को प्रभावित किया है। गीता के प्रचार-प्रसार में हरियाणा सरकार पूरा सहयोग कर रही है। इस प्रकार के आयोजन हमारी युवा पीढ़ी की चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, विदेश मंत्रालय और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में श्रीमद्भगवद्गीतोक्त स्वधर्मः कर्तव्यनिष्ठा, शांति, सद्भावना एवं स्वदेशी की प्रेरणा विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन 2025 के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, हरियाणा सरकार के परिवहन मंत्री अनिल विज, सामाजिक एवं न्याय मंत्री कृष्ण बेदी, सांसद नवीन जिंदल, प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञ सतीश जी, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, आचार्य विवेक मुनि, भाई साहब सतपाल जी, मौलाना काकोब, केडीबी मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल, अम्बेडकर केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह व अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान जर्नल ऑफ हरियाणा स्टडीज़ के विशेषांक तथा सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गीता के उपदेश 5000 वर्ष अधिक से पूर्व समस्त मानवता के उत्थान के लिए दिया हुआ ज्ञान है। यदि किसी को भारत की आत्मा को समझना है तो उसे कुरुक्षेत्र की धूल में ढूंढना होगा। यह धरती भूगोल का हिस्सा नहीं है। आज भी यहां खड़े होकर ऐसा लगता है कि कृष्ण की वाणी आज भी कुरुक्षेत्र की हवाओं में गूंज रही है। यह ज्ञान उस समय के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता व विश्व के लिए था। आत्मा कभी नहीं मरती है। जीवन की अनिश्चताओं व हर परिस्थिति से बाहर निकालता है। गीता का असली सदेंश त्यागी बनना है। अज्ञानता, अकर्मठता, अंहकार का त्याग का अर्थ गीता है। आज हम भटकाव व असमंजस में हैं। जीवन का उद्देश्य समझ नहीं आ रहा है। कुछ लोग कर्म से ज्यादा परिणाम की इच्छा कर रहे हैं। इस तरह की उलझी हुई स्थिति का सामना हमारे आस पास के लोग कर रहे है। हम अपने भीतर के सत्य को पहचाने। गीता का संदेश लोगों को संबल देता है। निराशा में भी आशा का संचार होता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हर निराशा, द्वंद, मन की शंकाओं से हमें गीता बाहर निकालती है। गीता न केवल आत्म चिंतन बल्कि थेरेपी का कार्य भी करती है। गीता हमें दिशा दिखाती है। हमारी समझ कैसे विकसित और समृद्ध हो। गीता महोत्सव एक सामान्य आयोजन नहीं बल्कि यह हमें हमारा कर्तव्य याद करवाता है। गीता हमें कर्म करना सिखाती है। हमें फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। गीता केवल ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय प्रबंधन का पुराना मॉडल है। भक्ति और योग से विचारों का शुद्धिकरण होता है। छोटे मन का व्यक्ति जीवन के बंधनों से मुक्त नहीं हो सकता। परम आनंद की कोई सीमा नहीं होती। अखिल ब्रह्मांड के जड़ व चेतन की अस्तित्व की सुरक्षा और परिपालन के नियम, विधान को धर्म कहते हैं। आज विश्वविद्यालयों में गीता पढ़ाई जा रही है। गीता शाश्वत व मार्गदर्शक ग्रंथ है। गीता पूरी मानवता व विश्व के लिए है। दुनिया के तमाम विचारक व महापुरुषों ने गीता के सिद्धान्तो को अपने जीवन में अपनाया। यह दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुका है। सुनीता विलियम्स भी अंतरिक्ष में गीता लेकर जाती है। आज भारत विश्व में शांति का संदेश देता है। बिना आत्मविश्वास के सहारे शान्ति टिक नहीं सकती। पहलगाम की घटना ने भारत की शालीनता को चुनौती दी थी। भारत में करुणा भी है और युद्ध भूमि की प्रेरणा भी है। ऑपरेशन सिंदूर भारत की आत्म सम्मान की उद्घोषणा थी। युद्ध बदले की भावना के लिए बल्कि धर्म की स्थापना के लिए होता है। भारत आतंकवाद के खिलाफ मौन नहीं रहेगा। ऑपरेशन सिंदूर धर्मयुद्ध था जिसे हमने अपनाया था। गीता केवल युगों की नहीं बल्कि हर क्षण की साथी है। कर्म की भूमि केवल कुरुक्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे भारत की है। वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में, किसान खेतों में, सैनिक सरहदों पर अपनी भूमिका निभा रहे है। संघर्ष सबके जीवन में है। संघर्ष से हारना नहीं चाहिए। गीता सभी वेदों का सार है। गीता की शिक्षा संसार को बदलने की बात नहीं करती। ज्ञानी व्यक्ति सुख दुख को समान भाव से देखता है। गीता की शिक्षाएं हमें सत्य की ओर ले जाती हैं। बिना मोह के हमें कर्म करना चाहिए।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता हमें स्वधर्म से पलायन न करने की शिक्षा देती है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को स्वधर्म का संदेश दिया था। भारत की नीति कभी युद्ध की नहीं रही है। गीता के कर्मयोग का हमें पालन करना चाहिए। स्वधर्म केवल मजहब की स्थिति नहीं है। धर्म उदारता, खुलेमन का नाम है। गीता सभी की है। गीता का प्रारंभ धर्म से होता है। मानवता हमें गीता सिखाती है। गीता के तत्व धर्म का पालन हमें जहां हो वहीं करना चाहिए। गीता का स्वधर्म वैश्विक प्रेरणा है। पूरे विश्व को शांति और सद्भाव के लिए गीता का अनुसरण करना चाहिए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने स्वागत भाषण देकर सम्मेलन के उद्देश्य, महत्व और गीता संदेश की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुवि को नैक द्वारा ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को उसके सभी प्रमुख प्रावधानों के साथ लागू करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश निस्वार्थ कर्म और स्वधर्म का पालन ही वास्तविक शांति और समरसता का मार्ग है।
कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि गीता को पढ़े और समझे। गीता को अपने जीवन में अपनाएं और आत्मसात करें और विकसित भारत के सपने को साकार करें।
हरियाणा सरकार के परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि कर्मयोग निस्वार्थ रूप से किया गया कार्य होता है। गीता में हर प्रश्न का उत्तर दिया हुआ है। हरियाणा सरकार के मंत्री कृष्ण बेदी ने मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार की ओर से सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया व गीता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक व प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञ श्री सतीश ने सम्मेलन की प्रस्तावना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि अपने धर्म, कर्तव्य में जीना श्रेयस्कर है। परधर्म में जीना विनाश का कारण है। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी प्यारी होती है। स्वदेशी का व्यापक अर्थ स्वभाषा, स्वभूषा, स्वधर्म, स्वकर्तव्य, स्वबोध है। जो स्व में स्थित है वो स्वस्थ है इसलिए भारत को स्व में स्थिर रहना है, स्वस्थ रहना है और स्वदेशी में आना है।
मौलाना काकोब ने कहा कि गीता इंसानियत, मुल्कों को चलाती है। उन्होंने गीता जिंदाबाद, भारत माता की जय का नारा लगवाया। जैन समाज के श्री विवेक मुनि जी ने कहा कि गीता का संदेश प्रत्येक व्यक्ति के लिए है और इसे हमे अपने जीवन में अपनाना चाहिए। गीता हमारे जीवन में चिंताओं और विषाद से मुक्त कर हमारे अंदर आत्मबल पैदा करती है। भाई सतपाल ने कहा कि गीता में 700 श्लोक है। यदि हम एक भी श्लोक जीवन में अपना ले तो हमें संतुष्टि मिल सकती है। गीता में पूरी मानवता की समस्या का समाधान है।
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने अपने वीडियो संदेश में गीता सम्मेलन की शुभकामनाएं दी। विदेश मंत्रालय की सचिव डॉ. नीना मल्होत्रा ने कहा कि गीता की सार्वभौमिक प्रासंगिकता और सांस्कृतिक कूटनीति के प्रति विदेश मंत्रालय प्रतिबद्ध है। अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की भागीदारी और गीता के 28 अनुदित संस्करणों की प्रदर्शनी गीता की वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाती है। कार्यक्रम का समापन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। मंच का संचालन प्रो. विवेक चावला ने किया।
इस अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, जय भगवान शर्मा डीडी, मलेशिया से संत स्वामी संत प्रकाशानंद महाराज, कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल, केडीबी के सीईओ पंकज सेतिया, एनआईटी के निदेशक डॉ. बीवी रमन्ना रेड्डी, कैप्टन परमजीत सिंह, संदीप छाबड़ा, सौरभ चौधरी, अशोक रोशा, राजेश शांडिल्य, अल्केश मोदगिल, विजय नरूला, जितेन्द्र, गुरनाम सैनी, हरमेश सिंह, सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. वनिता ढींगरा, प्रो. लखविन्द्र मेहरा, डॉ. बलदेव सेतिया, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कालेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. आनंद कुमार, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. दिनेश गुप्ता, प्रो. संजीव शर्मा, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, उप-निदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा, डॉ. सलोनी दिवान, डॉ. कुशविन्द्र कौर सहित गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।




