दिव्या ज्योति जागृती संस्थान ने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आश्रम में भगवान शिव के सम्मान में सत्संग कार्य कर्म का किया आयोजन

(पंजाब) फिरोजपुर 15 फरवरी [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर स्थानीय आश्रम में भगवान शिव के सम्मान में एक सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पवित्र प्रोग्राम में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया और रूहानी खुशी की प्राप्त किया।
सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी मोनिका भारती जी ने “महाशिवरात्रि का रूहानी महत्व और भगवान शिव जी का पूर्ण गुरु के बारे में रूहानी संदेश” टॉपिक पर अपने गहरे विचार रखे। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है, बल्कि एक पवित्र रात है जो आत्मा को जगाती है। यह वह रात है जब इंसान अज्ञानता, आलस और मोह के अंधेरे से उठकर आत्म-चेतना के प्रकाश की ओर बढ़ता है।
साध्वी जी ने कहा कि भगवान शिव जी त्याग, धैर्य, करुणा और समानता की जीती-जागती निशानी हैं। “शिव” का मतलब ही है — कल्याण। वह कल्याण जो सिर्फ़ शारीरिक ही नहीं बल्कि रूहानी ऊंचाइयों तक भी ले जाता है। महाशिवरात्रि की रात को जागना सिर्फ़ आंखों से जागना नहीं है, बल्कि अंदर की समझ को जगाना है। जब मन अंदर से पवित्र हो जाता है, तभी सच्ची शिव भक्ति का अनुभव होता है।
धार्मिक ग्रंथों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिव पुराण और दूसरे आध्यात्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि सच्चा ज्ञान सिर्फ़ पूर्ण गुरु की कृपा से ही मिलता है। भगवान शिव जी ने भी सद्गुरु की महानता को माना और यह संदेश दिया कि गुरु के बिना आध्यात्मिक यात्रा अधूरी है। पूर्ण गुरु की कृपा से ही ज्ञान का प्रकाश भीतर प्रकट होता है, जो इंसान को माया के बंधनों से आज़ाद करता है।
साध्वी जी ने आगे कहा कि शिव जी के गले में सांप, माथे पर चांद, जटाओं से बहती गंगा और तीसरी आंख – ये सभी प्रतीक इंसान को जीवन का गहरा संदेश देते हैं। सांप इंद्रियों पर कंट्रोल का प्रतीक है, चांद शांति और बैलेंस का प्रतीक है, गंगा पवित्रता का प्रतीक है और तीसरी आंख आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है। इन सभी गुणों को अपने जीवन में अपनाकर ही कोई सच्चा शिव भक्त बन सकता है। प्रोग्राम के दौरान, साध्वी बलजीत भारती ने भगवान शिव की महिमा में मधुर भजन और कीर्तन पेश किए। भक्ति में डूबे लोगों ने डांस और गाने के ज़रिए अपनी भक्ति दिखाई और रूहानी शांति का अनुभव किया। आखिर में, लोगों ने संकल्प लिया कि महाशिवरात्रि का असली संदेश — अपने अंदर के शिव तत्व को पहचानना, सतगुरु की शरण में जाना और धर्म के सच्चे रास्ते पर चलना — को अपने जीवन में अपनाना होगा। प्रोग्राम आरती और प्रसाद बांटने के साथ खत्म हुआ।




