पठन संस्कृति से निखरती है लेखन शैली और व्यक्तित्व: डॉ. जिम्मी शर्मा

लिटरेरी क्लब (अंग्रेज़ी), आईआईएचएस द्वारा ‘बुक रीडिंग इवेंट’ का आयोजन।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 24 फरवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इंस्टिट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज के लिटरेरी क्लब (अंग्रेज़ी) द्वारा ‘बुक रीडिंग इवेंट’ का आयोजन किया गया। स्नातक विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस विशेष पुस्तक पठन सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन की आदत विकसित करना, उनकी सोच को व्यापक बनाना तथा सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण का निर्माण करना था।
इस अवसर पर आईआईएचएस के अंग्रेज़ी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जिम्मी शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तक पठन सत्र से विद्यार्थियों की सोचने-समझने की क्षमता और विश्लेषण शक्ति विकसित होती है। नियमित पठन से भाषा पर पकड़ मजबूत होती है, शब्द भंडार समृद्ध होता है तथा लेखन शैली अधिक स्पष्ट, प्रभावशाली और प्रभावी बनती है। उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन से एकाग्रता, धैर्य और आत्म-अनुशासन जैसे गुणों का विकास होता है, जो विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हैं।
विद्यार्थियों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, प्रेरणादायक एवं सहज भाषा में लिखी गई पुस्तकों का चयन किया गया, ताकि प्रारंभिक स्तर पर पढ़ने की आदत विकसित हो सके। सत्र में जिन प्रमुख पुस्तकों पर चर्चा की गई, उनमें द अलकैमिस्ट, हू मूवड माय चीज, द लिटल प्रिंस, द ओल्ड मैन, मालगुडी डेज़ शामिल रहीं। इन पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों, आत्मविश्वास, परिवर्तन को स्वीकार करने की क्षमता तथा रचनात्मक सोच के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पुस्तकों के विचारों पर सार्थक चर्चा की, अपने अनुभव साझा किए तथा पढ़ने के महत्व को समझा। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पठन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि सरल पुस्तकों से शुरुआत कर कोई भी छात्र धीरे-धीरे गहन एवं गंभीर अध्ययन की ओर अग्रसर हो सकता है।
डॉ. जिम्मी शर्मा ने सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन कुछ समय पुस्तक पठन के लिए निकालने का संकल्प दिलाया। यह पठन सत्र विद्यार्थियों के बौद्धिक, भाषाई एवं व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।




