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कुरुक्षेत्र : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धाम मुरथल हरियाणा के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के सान्निध्य में समर्थगुरु आनंद धाम माधोपुर में तीसरे दिन “वर्तमान उपनिषद” की दिव्य चर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रेम भाव पर गहन प्रकाश डाला।
प्रेम भाव हमें अतीत और भविष्य के बंधनों से मुक्त करके वर्तमान में जीने की कला सिखाता है।
प्रेम एक दिव्य शक्ति है । जैसे दो पदार्थों के बीच आकर्षण की शक्ति गुरुत्वाकर्षण है, वैसे ही दो चेतनाओं के बीच आकर्षण की शक्ति प्रेम है।
इसकी सुंदर व्याख्या करते हुए समर्थगुरु ने प्रेम करने की कला के अनेक उपाय बताए और यह भी समझाया कि कामनामुक्त प्रेम ही हमें परमात्मा तक ले जाने वाला मार्ग बनता है।
प्रेम सृष्टि का सार है, प्रेम खुशी का द्वार।
प्रेम नहीं तो कुछ नहीं, सारा जगत असार॥
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू जी ने आज बताया कि अगर तुम दुःखी हो तो जानना कि तुम्हारा मन शिकायत से भरा है। अगर तुम प्रसन्न हो तो देखना तुम्हारा मन अहोभाव से भरा है।
इस शुभ अवसर पर समर्थगुरु धाम की सचिव मां मीराबाई, समर्थगुरू धाम के केंद्रीय संयोजक आचार्य दर्शन, समर्थगुरु धाम पंजाब के कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. मुनीश,आचार्य गोपाल, आचार्य गगन, स्वामी सुशील के साथ अनेक साधक अपने परिवार के साथ उपस्थित रहें।
सत्र के समापन पर सभी साधकों ने आनंद, उल्लास और कृतज्ञता के साथ धूमधाम से उत्सव मनाया।


