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कुरुक्षेत्र, 14 जून : उत्तर भारत के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पण्डित अमित मौदगिल ने सोमवती अमावस्या के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है.15 जून 2026 को पड़ने वाली यह सोमवती अमावस्या कई मायनों में अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोगों से युक्त है।
दुर्लभ संयोग और शुभ तिथियां।
इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे मंगलकारी योगों का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ और दान-पुण्य के फल को कई गुना बढ़ा देते हैं.
महत्वपूर्ण तिथियाँ और समय।
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 जून 2026, रविवार को दोपहर 12:20 बजे से अमावस्या तिथि समापन: 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 08:24 बजे तक।
मान्यता: उदया तिथि के अनुसार, सोमवती अमावस्या का व्रत, स्नान और दान 15 जून 2026 (सोमवार) को ही किया जाएगा।
स्नान-दान और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:03 बजे से सुबह 04:43 बजे तक (स्नान के लिए सर्वोत्तम)
इस दिन का धार्मिक महत्व।
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है.सोमवती अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की आराधना करने से न केवल वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है, बल्कि सौभाग्य में भी वृद्धि होती है.इसके अतिरिक्त, पितृ दोष से मुक्ति पाने और पूर्वजों के आशीर्वाद के लिए यह दिन अत्यंत प्रभावी माना गया है।
अमित मौदगिल, ज्योतिष विद्या केन्द्र, कुरूक्षेत्र। दूरभाष –
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