
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 30 जून : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है। रोगों की प्रारंभिक पहयान, उपपार संबंधी निर्णयों में सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवता में सुधार के लिए एआई का उपयोग बढ़ रहा है। विशेष बात यह है कि मरीजों की जानकारी भी गोपनीय रखी जाएगी जो इस दिशा में प्रभावी उपयोग है। अध्ययन में लीवर रोग की पहचान के लिए एक ऐसा एआई आधारित ढांचा विकसित किया गया है. जो अस्पतालों को मरीजों का संवेदनशील डेटा साझा किए बिना मिलकर मॉडल विकसित करने की सुविधा देता है। इस तकनीक को फेडरेटिड लर्निंग कहा जाता है, जिसमें केवल मॉडल से प्राप्त आदान-प्रदान होता है, न कि मरीजों की व्यक्तिगत जानकारी का। शोध में एक्सप्लेनेबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एक्सएआई) का भी उपयोग किया गया है। जिससे चिकित्सक यह समझ सकते हैं कि एआई किसी विशेष निष्कर्ष तक पहुंची। यह पारदर्शिता चिकित्सा क्षेत्र में एआई पर विश्वास बढ़ाने के लिए आवश्यक है। डाॅ दीपक का मानना है, कि अध्ययन में विकासित मॉडल ने 99 प्रतिशत सटीकता प्राप्त की तथा डायरेक्ट बिलिरूबिन, एसजीओटी, एल्कलाइन फाॅस्फेट जैसे महत्वपूर्ण जैव रासायनिक संकेतकों को लीवर रोग की पहचान में प्रमुख पाया। यह परिणाम स्थापित चिकित्सीय ज्ञान के अनुरूप हैं और एआई की विश्वसनीयता को प्रमाणित करते हैं। विश्वभर में स्वास्थ्य सेवाएं तेजी से डिजिटल हो रही हैं। ऐसे में गोपनीयता-सुरक्षित और पारदर्शी एआई समाधान न केवल बेहतर निदान में सहायता करेंगे, बल्कि अस्पतालों के बीच सहयोग बढ़ाने और रोगियों का विश्वास मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाएंगे। भविष्य का स्वास्थ्य तंत्र केवल अधिक सटीक एआई पर नहीं, बल्कि सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार आधारित होगा।
प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार (प्रोफेसर, एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, मोहाली)


