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एम्स रायबरेली में चिकित्सा जगत की एक बड़ी उपलब्धि: उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में पहली

रायबरेली
रिपोर्टर विपिन राजपूत

एम्स रायबरेली में चिकित्सा जगत की एक बड़ी उपलब्धि: उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में पहली

बार ‘जेली बेली’ की जटिल सर्जरी और HIPEC सफल!
​हमें साझा करते हुए अत्यंत गर्व है कि AIIMS Raebareli की सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम ने स्यूडोमिक्सोमा पेरिटोनाई (PMP), जिसे आमतौर पर ‘जेली बेली’ (Jelly Belly) कहा जाता है, के एक अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामले में बड़ी सफलता हासिल की है।
​इस क्षेत्र (रायबरेली और आसपास के यूपी) में पहली बार इतनी उच्च-स्तरीय तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग किया गया है।
​🔬 विशेषज्ञ टीम (Expert Team):
​इस जटिल प्रक्रिया को निम्नलिखित विशेषज्ञों के कुशल नेतृत्व और सहयोग से संपन्न किया गया:
​सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम:
​मुख्य सर्जन: डॉ. अविनाश चंद्र सिंह (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट)
​सहायक: डॉ. अक्षय एवं डॉ. अनुष्का (Senior Residents)
​एनेस्थीसिया टीम:
​डॉ. अभय राज यादव (Assistant Professor)
​डॉ. प्रवीण (Senior Resident)
​कार्यकारी निदेशक (Executive Director) प्रो. (डॉ.) अमिता जैन के मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन से यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हो सकी है।
​💡 सर्जरी की मुख्य बातें:
​व्यापक साइटोरिडक्टिव सर्जरी (CRS): इसमें टोटल पेरिटोनेक्टोमी, राइट हेमीकोलेक्टोमी और मल्टीविसेरल रिसेक्शन जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल थीं।
​एडवांस्ड HIPEC तकनीक: सर्जरी के तुरंत बाद 41-43°C पर माइटोमाइसिन-सी के साथ हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी दी गई।
​💪 एक कठिन संघर्ष और जीत:
​ऑपरेशन के बाद मरीज को AKI (किडनी की समस्या) और ARDS (फेफड़ों की समस्या) जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन हमारी मल्टीडिसिप्लिनरी आईसीयू और सर्जिकल टीम की 24/7 निगरानी और समर्पण के कारण, मरीज ने इन सभी बाधाओं को पार किया।
​हमें यह बताते हुए खुशी है कि मरीज अब पूरी तरह स्थिर है और POD-13 पर उसे सुरक्षित डिस्चार्ज कर दिया गया है। यह सफलता आधुनिक ऑन्कोलॉजी और टीम वर्क की जीत है।

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