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बसंत पंचमी मां सरस्वती की कृपा प्राप्ति का पर्व है : आचार्य डा. मिश्रा

थानेसर, संजीव कुमारी 22 जनवरी : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरू मैत्री संघ हिमाचल के जोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 , शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व धूम धाम से सारे संसार में मनाया जायेगा।
बसंत पंचमी का संबंध माता सरस्वती से है। पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो सृष्टि में कोई जीवन था। लेकिन वह जीवन शांत और बिना किसी आवाज के था। भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल छींटा, जिससे देवी सरस्वती प्रकट हुईं। मां सरस्वती ने वीणा बजाकर पूरे संसार में मधुर आवाज फैलाई और सृष्टि में जीवन का संचार हुआ। मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है और माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी मनाए जाने लगी।
मां सरस्वती की कृपा प्राप्त का शुभ अवसर है : बसंत पंचमी का पर्व स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थानों में भी मनाया जाता है। जो साधक इस अवसर पर माता सरस्वती की पूजा सच्ची भक्ति के साथ करते हैं उन्हें मां बुद्धि, विद्या और ज्ञान प्रदान करती हैं । क्योंकि वे ज्ञान की स्वामिनी हैं। इस पर्व पर छात्र और शिक्षक नए कपड़े पहनते हैं और ज्ञान की देवी की विशेष पूजा करते हैं। साथ ही देवी को प्रसन्न करने के लिए गीत और नृत्य आदि का आयोजन करते हैं। विद्यार्थियों को पुस्तके, पैन, कॉपी आदि का सहयोग कर सकते है।
मां सरस्वती के दिव्य मंत्र : ऐं ( ऐम्) ।
ॐ सरस्वत्यै नमः।
आप इस विधि से करें मंत्रों का जाप : बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद मां सरस्वती का ध्यान करें। भगवान श्री विष्णु, मां सरस्वती और भगवान श्री राधे कृष्ण की पीले रंग के फूल से पूजा करें। इसके बाद आप इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं। पीले और मीठे चावल एवं पीले हलुवे जा भोग लगाकर स्वयं और परिवार सहित श्रद्धा भक्ति से सेवन कीजिए।
विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का महत्व :
विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष है। मान्यता है कि इस दिन यदि कोई बच्चा अपनी शिक्षा की शुरुआत करता है, तो वह बहुत बुद्धिमान बनता है। इसे ‘अक्षर अभ्यास’ या ‘ विद्या आरम्भ’ संस्कार कहा जाता है। विद्यार्थियों के लिए विशेष सुझाव : आज के दिन अपनी सबसे प्रिय पुस्तक का पाठ जरूर करें। कलम और कॉपी की पूजा करें और संकल्प लें कि आप अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करेंगे। मां सरस्वती के चरणों में मोरपंख रखना बहुत शुभ माना जाता है। विशेष ध्यान और सुमिरन करें।
बसंत पंचमी के दिन क्या करें ?
बसंत पंचमी के दिन सत्यं शिवम् सुंदरम कार्य करें। इस दिन से बसंत ऋतु आरंभ होती है। इस दिन पेड़-पौधे लगाए ।
*बसंत पंचमी के दिन परिवार सहित सदगुरू और मां सरस्वती की आरती करे और प्रसाद लगाएं। सभी प्रसाद श्रद्धा पूर्वक लीजिए। ट्वीटर के माध्यम से समर्थगुरू धाम के मुख्य संस्थापक आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि संबंध ही संसार है। संबंध कामना पर आधारित है। कामना ही निराशा की जननी है। अपनी कामना के प्रति जागो और अधिक से अधिक साक्षी और सुमिरन में रहो।
आकार में दुख है निराकार में शांति है और सुमिरन में आनंद है। सदा सुमिरन में रहें।

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