डेयरी फार्मिंग – लुवास में कौशल विकास प्रशिक्षण का समापन

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877
हिसार, 8 फरवरी : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार के पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग द्वारा कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत पशुपालकों के लिए डेयरी फार्मिंग पर कौशल विकास हेतु आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया।
समारोह में मानव संसाधन प्रबंधन निदेशिका डॉ. सोनिया सिंधु मुख्य अतिथि रहीं तथा पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज रोज एवं विभाग के विभागाध्यक्ष ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
मुख्य अतिथि डॉ. सोनिया सिंधु ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व और प्रसन्नता की बात है कि दूर-दूर से पशुपालक प्रशिक्षण लेने यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि डेयरी व्यवसाय में सफलता के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी बेहद जरूरी है। पशुपालकों को पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए तथा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए आधुनिक तरीकों को अपनाकर उत्पादन और आय बढ़ानी चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षार्थियों से अपील की कि वे यहां से प्राप्त ज्ञान को अन्य पशुपालकों तक भी पहुंचाएं।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. मनोज रोज ने कहा कि पशुपालन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय सदैव पशुपालकों के साथ खड़ा है। भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि पशुपालकों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी मिलती रहे। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की ओर से खनिज मिश्रण, बाल्टी, छलनी तथा प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
प्रशिक्षण के निदेशक प्रो. डॉ. सतपाल दहिया ने बताया कि यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की नस्ल सुधार योजना के तहत आयोजित किया गया, जिसमें 60 अनुसूचित जाति के पशुपालकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा डेयरी प्रबंधन, पशुओं की उन्नत नस्लें, संतुलित आहार, पशु आवास, नवजात पशुओं की देखभाल, प्रजनन प्रबंधन, स्वच्छ दूध उत्पादन, प्रमुख रोगों की रोकथाम एवं टीकाकरण आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण में प्रशिक्षण समन्वयक के रूप में डॉ. मनोज कुमार वर्मा, डॉ. कमलदीप तथा डॉ. पूनम रतवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सहायक जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य वैज्ञानिक जानकारी को गांव स्तर तक पहुंचाना है, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक आधुनिक तकनीकों को अपनाकर लाभान्वित हो सकें।




