एक पत्थर की भी किस्मत चमक सकती है, बशर्ते उसे अच्छा मूर्तिकार मिले’

‘एक पत्थर की भी किस्मत चमक सकती है, बशर्ते उसे अच्छा मूर्तिकार मिले’
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में जीवन कौशल पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 15 जनवरी : गुरुकुल कुरुक्षेत्र में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के उद्देश्य से जीवन कौशल पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया जिसके मुख्य सत्रों का संचालन प्रो. प्रदीप कुमार, निदेशक, आईटी सेल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा रूबी त्यागी, प्रधानाचार्या डिस्कवरी वर्ल्ड स्कूल, लाडवा द्वारा किया गया। दोनों संसाधन व्यक्तियों ने अपने प्रेरणादायी विचारों और अनुभवों के माध्यम से शिक्षकों को संबोधित किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा, निदेशक गुरुकुल कुरुक्षेत्र द्वारा किया गया। उन्होंने सभी प्रतिभागी शिक्षकों का आत्मीय स्वागत किया तथा कार्यक्रम की कार्यवाही आगे बढ़ाने हेतु संसाधन व्यक्तियों का परिचय प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली में जीवन कौशल का समावेश अत्यंत आवश्यक है ताकि विद्यार्थी आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और व्यवहारिक जीवन के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।
प्राचार्य सूबे प्रताप ने कहा कि एक पत्थर की भी किस्मत बदल सकती है बशर्ते उसे कोई अच्छा तराशने वाला मूर्तिकार मिल जाए अर्थात समाज में एक अध्यापक की भूमिका उस मूर्तिकार जैसी है जो एक सामान्य से पत्थर को भी अपनी बुद्धिमत्ता और रचनात्मकता से बहुत सुन्दर मूर्ति का रूप प्रदान कर, उसे असाधारण बना देता है। उन्होंने कहा कि हम सभी का यह नैतिक दायित्व है कि युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन देकर उनके जीवन को सही दिशा दें ताकि वे देश के सभ्य नागरिक बनकर राष्ट्र और समाज की उन्नति के लिए कार्य करें।
सत्र के दौरान सकारात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, प्रभावी संप्रेषण, समस्या-समाधान और बदलते समय के अनुरूप स्वयं को ढालने जैसे महत्त्वपूर्ण जीवन कौशलों पर विस्तार से चर्चा की गई। संसाधन व्यक्तियों ने उदाहरणों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि शिक्षक किस प्रकार विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सकारात्मक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता विकसित कर सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में हुआ। इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम ने शिक्षकों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें अपने शिक्षण कार्य में जीवन कौशल को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सक्षम भी बनाया। यह कार्यक्रम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।




