हिन्दी भाषा भारतीय संस्कृति और सभ्यता की महत्वपूर्ण धरोहर है : डा. श्रीप्रकाश मिश्र

राष्ट्र भाषा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में भाषा संवाद कार्यक्रम संपन्न।
आज हमें हिंदी के विकास और प्रसार के लिए संकल्प लेना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसे गर्व से अपनाएं।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 14 सितम्बर : हिंदी भाषा भारत की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की आधारशिला है। हिन्दी भाषा भारतीय संस्कृति और सभ्यता की महत्वपूर्ण धरोहर है। यह केवल संवाद का माध्यम मात्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना का आधार भी है। भारत में हिन्दी भाषा बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है। यह भाषा देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का काम भी करती है। यह विचार राष्ट्र भाषा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित भाषा संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों ने अनेक हिंदी की कविताएं, गीत एवं कहानियाँ प्रस्तुत की। इस अवसर पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यर्थियों द्वारा पुष्पों के द्वारा हिंदी दिवस को दर्शाया गया।
भाषा संवाद को सम्बोधित करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा हिंदी भाषा सिर्फ बोलचाल का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी धरोहर है जो हमारी सभ्यता, रीति रिवाज और परंपराओं को संजोए हुए है। आज हमें हिंदी के विकास और प्रसार के लिए संकल्प लेना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसे गर्व से अपनाएं। हिंदी दिवस हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाए जाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 14 सितंबर, 1949 को, भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को नव स्वतंत्र राष्ट्र की आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाया। यह निर्णय भाषाई एकता को बढ़ावा देने और भारत के विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच प्रशासन और संचार की एक साझा भाषा को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा था।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा हिंदी दिवस भारत के राष्ट्रीय ताने बाने में हिंदी के महत्व की याद दिलाता है। इस दिवस को मनाकर, भारत एकता और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने में इस भाषा की भूमिका को स्वीकार करता है। आज जैसे जैसे देश आगे बढ़ रहा है और विकसित हो रहा है, हिंदी की प्रमुखता को बनाए रखना और बढ़ाना, भाषाई और सांस्कृतिक विभाजन को पाटने के साथ साथ भारत की भाषाई विरासत की समृद्ध विविधता को अपनाने में महत्वपूर्ण होगा। हिन्दी दिवस का मुख्य उद्देश्य हिन्दी भाषा को और अधिक सम्मान दिलाना, उसे आधुनिक युग के तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्र में भी प्रयोग में लाना है। ये दिन न केवल भाषा के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की भी प्रेरणा देता है। हमें हमारी मातृभाषा के प्रति गर्व महसूस करने और उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित करता है। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य, विद्यार्थी, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन विद्यर्थियों द्वारा हिंदी भाषा के जयघोष से हुआ।




