वैश्विक दौर में उच्च शिक्षा क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीयकरण वर्तमान समय की मांग : प्रो. सोमनाथ सचदेवा

जापान की शीर्ष यूनिवर्सिटीज से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मिली नई दिशा : प्रो. सोमनाथ सचदेवा।
एनईपी 2020 के तहत एआईयू के 30 विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने किया जापान के विश्वविद्यालयों का दौरा।
कुरुक्षेत्र, (संजीव कुमारी) 19 जनवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक दौर में उच्च शिक्षा क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीयकरण वर्तमान समय की मांग है क्योंकि ज्ञान, शोध, नवाचार एवं उद्यमिता की सीमाएं अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रहीं। आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा, नई तकनीकों और बहुसांस्कृतिक कार्य परिवेश के चलते विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ना अनिवार्य हो गया है। यह विचार कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने एनईपी 2020 के तहत एआईयू के 30 विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल जापान देश के विश्वविद्यालयों का दौरा करने के पश्चात व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक दौरा 12 से 17 जनवरी के बीच आयोजित हुआ।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीयकरण से न केवल विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा, शोध और इंटर्नशिप के अवसर मिलते हैं, बल्कि फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध परियोजनाओं और संयुक्त डिग्री प्रोग्राम्स के माध्यम से विश्वविद्यालयों की अकादमिक गुणवत्ता भी सुदृढ़ होती है। वहीं इससे विद्यार्थियों में वैश्विक सोच, सांस्कृतिक समझ और रोजगार योग्य कौशल का विकास होता है। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान टोक्यो में यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जेट्रो), सोफिया यूनिवर्सिटी तथा मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन, संस्कृति, खेल, विज्ञान एवं तकनीक आदि विषयों पर व्यापक विचार- विमर्श हुआ। इस दौरान जापान में भारत के राजदूत के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही क्योटो शहर में क्योटो यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस साइंसेज के साथ इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग, विशेष रूप से मटेरियल साइंस और एनर्जी सेक्टर में आपसी सहयोग, संयुक्त शोध तथा फैकल्टी, स्टूडेंट्स आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर गहन चर्चा की गई।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इस अंतरराष्ट्रीय दौरे में शामिल किए जाने के लिए हरियाणा के राज्यपाल एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. असीम घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी एवं भारतीय विश्वविद्यालय संघ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय जापान की इन प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज के साथ प्रत्यक्ष एमओयू कर अपने छात्रों, शोधार्थियों और फैकल्टी के लिए शिक्षा, शोध, इंटर्नशिप एवं रोजगार के और अधिक अवसर सुनिश्चित करेगा। प्रो. सचदेवा ने विश्वास जताया कि जापान से मिली इन सकारात्मक सीखों को भारतीय शिक्षा व्यवस्था में लागू करने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। विद्यार्थियों को मिलेंगे शोध, इंटर्नशिप एवं रोजगार के अवसर
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि जापान देश के शैक्षणिक दौरे पर कंसाइ यूनिवर्सिटी, जापान के अंतर्गत ओसाका यूनिवर्सिटी, ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी एवं क्योटो यूनिवर्सिटी के साथ भारतीय विश्वविद्यालयों का एआईयू के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में एक एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के अंतर्गत भविष्य में विद्यार्थियों को जॉइंट डिग्री प्रोग्राम्स, उच्च स्तरीय शिक्षा, शोध, इंटर्नशिप और रोजगार के अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध होंगे।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि दौरे के अंतिम चरण में ओसाका शहर में कंसाइ यूनिवर्सिटी, ओसाका यूनिवर्सिटी, ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी एवं क्योटो यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित हुई। उल्लेखनीय है कि इन विश्वविद्यालयों ने विश्व को लगभग 12 नोबेल पुरस्कार विजेता प्रदान किए हैं। इस अवसर पर कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा सहित प्रतिनिधिमंडल ने कंसाइ यूनिवर्सिटी की अत्याधुनिक सेमी कंडक्टर लैबोरेटरी सहित अन्य शोध सुविधाओं का भी अवलोकन किया गया।
स्वच्छता, अनुशासनता, समयबद्धता देश की प्रगति का आधार
कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति में स्वच्छता, अनुशासनता, समयबद्धता आदि मुख्य कारक होते हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल को जापान के लोगों की विनम्रता, अनुशासनप्रियता, समयबद्धता, स्वच्छता, उच्च सुरक्षा मानकों और विश्वस्तरीय पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से अत्यंत प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि जापान में सड़कों पर कूड़ेदान न होने के बावजूद भी कहीं गंदगी नहीं दिखती, क्योंकि लोग कूड़े को स्वयं संभालकर निर्धारित स्थानों पर ही निस्तारित करते हैं। यह सब व्यक्तिगत चरित्र निर्माण का परिणाम है, जिसे हमारे शिक्षण संस्थानों में भी अपनाने की आवश्यकता है।




