कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने बीकानेर में प्रस्तुत किया नाटक कैन आई से समथिंग

‘‘वाह रे शरीफ लोगो, सुकून भी चाहिए, पर दूसरों की कुर्बानी पर’’……जैसे संवादों ने बीकानेर के दर्शकों को झकझोरा।
थार नाट्य समारोह, बीकानेर में कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने छोड़ी अनूठी छाप, नाटक कैन आई से समथिंग का किया मंचन।
थानेसर, (संजीव कुमारी) 28 जनवरी : उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज द्वारा बीकानेर विकास प्राधिकरण के सहयोग से बीकानेर में आयोजित पांच दिवसीय थार नाट्य महोत्सव का आगाज कुरुक्षेत्र के न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने नाटक कैन आई से समथिंग के मंचन से किया। विकास शर्मा के निर्देशन में गम्भीर संवाद और उम्दा अभिनय से सजे नाटक कैन आई से समथिंग रंगमंच कलाकार पवन और किशोर की बातचीत से आरम्भ होता है। पवन यूनान के महान दार्शनिक सुकरात और प्लेटो पर नाटक लिख रहे हैं, जिसके बारे में सुनने की जिज्ञासा किशोर दिखाता है। पवन सुकरात के जीवन को वर्तमान काल से जोड़कर विभिन्न दृश्यों को दिखाने का प्रयास करता है। वह बताता है कि सुकरात को देवताओं पर विश्वास नहीं करने और युवाओं को भड़काने जैसे आरोपों के कारण मौत की सजा सुनाई गई थी। ग्रीक की जनता सुकरात के खिलाफ हो गई थी। क्योंकि सुकरात ने धर्म पर आश्रित लोगों को अपने परिवार के लिए जीवन बिताने के तर्क दिए। राजनेताओं को जनता की भलाई करने के तर्क दिए। जिसके कारण सभी लोग चाहते थे कि सुकरात को मार दिया जाए। सुकरात का शिष्य प्लेटो अपने गुरु को बचाने के प्रयास करता रहा, लेकिन सुकरात ने प्लेटो की कोई बात नहीं मानी। प्लेटो चाहता था कि सुकरात अदालत का फैसला मानकर वो सब काम बंद कर दे, जिसके कारण उसे सजा मिली है। लेकिन सुकरात मौत की सजा को ज्यादा अहमियत देता रहा। उसका मानना था कि अदालत का फैसला मानकर माफी मांगने के बाद मैं ज्यादा दिन जिंदा नहीं रह पाऊंगा, लेकिन अपने सिद्धांतों पर डटे रहने के कारण मौत की सजा पाने से मैं हमेशा के लिए लोगों के दिलों में जिंदा रहूंगा। इस तरह सुकरात की अनूठी दास्तान का बखान करता हुआ नाटक कैन आई से समथिंग समाज के चेहरे को लोगों के सामने लाने का प्रयास करता है। एनसीजेडसीसी के निदेशक सुदेश शर्मा के दिशा निर्देश में आयोजित नाटक कैन आई से समथिंग में पवन का किरदार सागर शर्मा तथा किशोर का किरदार डॉ. राजीव कुमार ने निभाया। प्रकाश व्यवस्था गौरव दीपक जांगड़ा तथा संगीत विकास शर्मा ने सम्भाला। सहायक के रुप में सूर्यांश चावला, सुग्रीव मैहरा, आकाशदीप रहे। नाटक कैन आई से समथिंग ने सवा घण्टे तक बीकानेर के कलाप्रेमियों को अपने संवाद और अभिनय से बांधे रखा। सभागार में बैठे दर्शकों ने एक-एक संवाद पर अपनी प्रतिक्रिया तालियों के माध्यम से व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रंगकर्मी विपिन पुरोहित, सुधेश व्यास, मधु आचार्य, एनसीजेडसीसी से प्रतिनिधि प्रांजल यादव सहित बीकानेर के कलाप्रेमी उपस्थित रहे।




