
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर प्राइवेट एवं पब्लिक स्कूलों द्वारा, पूर्णतः व्यवसाय का रूप ले चुकी है। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा स्तर संतोषजनक न होने के कारण अभिभावक विवश होकर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाने को बाध्य हैं।
इस परिस्थिति का लाभ उठाते हुए प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों का निरंतर आर्थिक शोषण किया जा रहा है। प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित हैं ,
हर वर्ष पुनः एडमिशन शुल्क
एक ही विद्यालय में अध्ययनरत छात्र द्वारा एक कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अगली कक्षा में प्रवेश हेतु पुनः एडमिशन शुल्क लिया जा रहा है, जो पूर्णतः अनुचित एवं शोषणकारी है।
बिंदु नंबर 1* पाठ्यपुस्तकों में भारी कमीशनखोरी
विद्यालय प्रबंधन द्वारा निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने हेतु बाध्य किया जाता है, जिससे ₹1000–1500 की पुस्तकों को ₹4000–5000 तक में खरीदना पड़ता है।
बिंदु नंबर 2
ड्रेस एवं स्टेशनरी में लूट:
₹200–300 की ड्रेस को ₹1500–2000 तक में बेचा जा रहा है, तथा अभिभावकों को स्वतंत्र रूप से खरीदने की अनुमति नहीं दी जाती।
बिंदु नंबर 3 मनमानी फीस संरचना प्राइवेट स्कूलों द्वारा बिना किसी सरकारी नियंत्रण के अत्यधिक एवं मनमानी फीस वसूली जा रही है, जिससे मध्यम वर्ग के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
अतः महोदय/महोदया से विनम्र निवेदन है कि एक ही विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों के लिए प्रत्येक वर्ष पुनः एडमिशन प्रक्रिया एवं शुल्क पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अभिभावकों को पाठ्यपुस्तक एवं ड्रेस किसी भी विक्रेता से खरीदने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए तथा बाध्य करने वाले विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्राइवेट स्कूलों की फीस प्रत्येक कक्षा के अनुसार निर्धारित कर उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने हेतु प्रभावी एवं कठोर नियम बनाए जाएं।
यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो शिक्षा केवल संपन्न वर्ग तक सीमित रह जाएगी और मध्यम एवं निम्न वर्ग के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
अतः आपसे निवेदन है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए,जो भी विद्यालय सरकारी मानकों के विपरीत मनमानी एवं अवैध फीस वसूल रहे हैं, उनकी मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।”
स्वामी शैलेंद्रनंद विश्व प्रताप सिंह विनोद मिश्रा संतोष सिंह प्रदीप गंगवार सोनू सिंह रूबी मिश्रा आराध्या रुद्रांशी मधु पाठक ज्योति कश्यप लक्ष्मी शर्मा पूजा राजपूत नीतू राजपूत राकेश यादव नवीन सक्सेना देवेंद्र मोर्य आयुष वर्मा सुधीर शर्मा सोनू पाठक ओम गंगवार कन्हैया मिश्रा हिमांशु रस्तोगी राजेंद्र साहू प्रिंस चंद्र राजा राम शर्मा उपेंद्र राठौर आदि उपस्थित रहे।

