सिद्ध चिकित्सा पद्धति शरीर,मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित : कुलपति प्रो. धीमान

श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में मनाया गया 9वां सिद्धा चिकित्सा दिवस।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 6 जनवरी : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के सिद्ध चिकित्सा केंद्र में मंगलवार को 9वां सिद्ध दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणधीर सिंह तथा आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला द्वारा सिद्ध चिकित्सा पद्धति के जनक महर्षि अगस्त्य को दीप प्रज्वलित व पुष्प अर्पित करके किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि सिद्ध चिकित्सा पद्धति भारत की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सिद्ध चिकित्सा में रोगों की जड़ पर कार्य करने की अद्भुत क्षमता है और यह आज भी जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्यंत प्रासंगिक है। कुलपति ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सिद्धा सहित आयुष की सभी पद्धतियों का गहन अध्ययन कर समाज सेवा में योगदान दें।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए सिद्ध स्पेशल वर्मा थेरेपी का व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें सीनियर डोमेन एक्सपर्ट सिद्ध चिकित्सक डॉ. पी. निर्मला देवी ने विद्यार्थियों को सिद्ध चिकित्सा की महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सिद्धा चिकित्सा की वैज्ञानिकता, इसके चिकित्सकीय लाभ तथा आधुनिक जीवन शैली से उत्पन्न रोगों के उपचार में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर प्रो. रवि राज, होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. कुलजीत कौर, डॉ. रिया शर्मा, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. चक्रपाणि आर्य सहित अन्य विशेषज्ञ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




