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लोक कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार गंभीर : गजेंद्र फौगाट

सांग महोत्सव में तीसरे दिन सांग लीलो चमन, बणदेवी,पिंगला भरथरी, शाही लकड़हारा, दुष्यंत शकुंतला का हुआ मंचन।

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 25 फरवरी : मुख्यमंत्री के ओएसडी व हरियाणा कला परिषद के अतिरिक्त निदेशक गजेंद्र फौगाट ने कहा कि आज का युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर अग्रसर होने के कारण लोक संस्कृति से अनभिज्ञ है, जिसके कारण सांग विधा में युवा पीढ़ी रुचि नहीं लेती, लेकिन प्रदेश सरकार के सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग द्वारा आयोजित सांग महोत्सव न केवल बुजुर्गों का मनोरंजन कर रहा है, बल्कि महिलाएं तथा युवा भी सांग उत्सव का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के ओएसडी व हरियाणा कला परिषद के अतिरिक्त निदेशक गजेंद्र फौगाट ने विशेष रूप से पहुंचकर सांग कलाकारों को प्रोत्साहित किया। गजेंद्र फौगाट ने सांग उत्सव के दौरान निर्णायक की भूमिका अदा कर रहे पद्मश्री महाबीर गुड्डू, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रेम सिंह देहाती, प्रो. रामनिवास शहरावत तथा डा. हनीफ खान व रामनिवास शर्मा को पगड़ी पहनाकर आभार जताया। इसके अलावा दर्शकों की मांग पर गजेंद्र फौगाट ने हरियाणवी रागनी सुनाकर लोगों का दिल जीता।
उन्होंने कहा कि सांग लोक नाट्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जो भारत के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय है। किंतु हरियाणा में आधुनिकता के कारण सांग विधा लुप्त होने की कगार पर खड़ी नजर आ रही थी। जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार गंभीरता दिखा रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के के दिशा-निर्देश में हरियाणवी संस्कृति को बचाने तथा युवा वर्ग को संस्कृति से जोड़े रखने के लिए सांग उत्सव जैसे प्रयास करके सूचना, जनसम्पर्क विभाग, कला एवं सांस्कृतिक विभाग तथा हरियाणा कला परिषद हरियाणवी लोक संस्कृति को बढ़ावा देने में प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगभग 3000 सांग तथा रागनी कार्यक्रमों के माध्यम से हरियाणवी लोक विधाओं का प्रचार किया जा रहा है। इसके अलावा 1000 से अधिक कलाकारों को मंच प्रदान करते हुए उनकी आजीविका का साधन प्रदान किया गया। धनपत सिंह सांगी स्मृति पुरस्कार योजना के अंतर्गत चल रहे पांच दिवसीय सांग महोत्सव के तीसरे दिन सांगी समंदर सिंह, कृष्ण लाल, स्वामी कर्ण सिंह, वेद प्रकाश अत्री और कृष्ण कुमार ने सांग मंचन कर हरियाणवी लोक विधा का सजीव चित्रण किया।

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