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पर्सनालिटी डेवलपमेंट और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दे विद्यार्थीः प्रो. तेजेंद्र शर्मा

मीडिया लोगों की सोच, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता हैः प्रो. हरदीप जोशी।
कठिन परिश्रम से ही सफलता संभवः डॉ. सलोनी पवन दीवान।
अच्छा सीखने के लिए स्वयं का मूल्यांकन करना आवश्यकः डॉ. उत्कर्ष मंगल।
मीडिया संस्थान में पाँच दिवसीय कार्यशाला ‘का दूसरा दिन सम्पन्न।

थानेसर कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 24 फरवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के कुशल मार्गदर्शन में अटल संचार भवन स्थित जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के मिनी ऑडिटोरियम में निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया की अध्यक्षता में कॉर्पोरेट संसाधन केंद्र (रूसा प्रोजेक्ट) एवं जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला ‘कॉरपोरेट स्किल डेवलपमेंट इन मास कम्युनिकेशन’ के दूसरे दिन का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सलोनी पवन दिवान तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उत्कर्ष मंगल विद्यार्थियों से रू-ब-रू हुए।
डॉ. सलोनी पवन दीवान ने व्यक्तित्व विकास के महत्व पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा कि कठिन परिश्रम से ही सफलता संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय और वातावरण के अनुरूप आत्म मूल्यांकन व आत्मविश्लेषण करने की प्रेरणा दी। दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित करने तथा महान व्यक्तित्वों की जीवनशैली से सीख लेने का आह्वान करते हुए डॉ. उत्कर्ष मंगल ने अपने जीवन के उतार-चढ़ावों के उदाहरण साझा करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि अच्छा सीखने के लिए पहले सुनना, पढ़ना और स्वयं का मूल्यांकन करना आवश्यक है।
दूसरे सत्र में प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि आधुनिक युग में एक विद्यार्थी की सफलता केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास और एक मजबूत पर्सनल ब्रांड के निर्माण पर निर्भर करती है। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को अपनी डिग्री के साथ-साथ आत्मविश्वास, प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल्स और निरंतर सीखने की आदत को आत्मसात करना चाहिए, क्योंकि यही गुण उन्हें पेशेवर दुनिया की भीड़ में एक विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।
मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. हरदीप जोशी ने कहा कि मीडिया और मनोविज्ञान एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं, क्योंकि मीडिया लोगों की सोच, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि तनाव प्रबंधन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक दबाव को संतुलित कर स्वस्थ व सकारात्मक जीवन जीने की क्षमता विकसित करता है।
संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस पाँच दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी कौशल विकास करना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास ‘स्किल’ पर आधारित है और कार्यशालाओं से प्राप्त प्रशिक्षण उनके भविष्य के लिए कौशल-आधारित संपत्ति सिद्ध होगा।
कार्यशाला की सह- संयोजिका असिस्टेंट प्रोफेसर रोमा सिंह ने बताया कि ‘कॉरपोरेट स्किल डेवलपमेंट इन मास कम्युनिकेशन’ के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों एवं मीडिया क्षेत्र के विशेषज्ञों का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। संयोजक डॉ. आबिद अली ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों की कॉरपोरेट एवं औद्योगिक कौशल को निखारने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। दूसरे सत्र में प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा ने विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल एवं मीडिया उद्योग की वर्तमान चुनौतियों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन बीएमएमसी चतुर्थ सेमेस्टर की छात्राओं मानसी और आस्था ने किया।
इस अवसर पर संस्थान की एसोसिएट प्रोफेसर मधुदीप सिंह, डॉ. अभिनव, डॉ. रोशनलाल मस्ताना, डॉ. तपेश किरण, डॉ. प्रदीप कुमार, सचिन वर्मा, राकेश कुमार, अमित जांगड़ा, राहुल अरोड़ा, सुनीता, रितु, अर्पणा, प्रीति, सन्नी सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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