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सरस्वती तीर्थ पर देखने को मिला हिंदू-सिख समुदाय की एकता का नजारा

चैत्र चौदस मेले ने श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरोने का किया काम, अपनों से मिलने का मेले में मिलता है मौका, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सम्पन्न हुआ चैत्र चौदस मेला।

पिहोवा, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 19 मार्च : ऐतिहासिक धर्मनगरी पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर चैत्र चौदस मेले के यादगार लम्हों ने हिंदू ओर सिख समुदाय के लाखों लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। दोनों समुदाय के लोग इस तीर्थ के पवित्र जल में एक साथ डुबकी लगाकर अपने पितरों की शांति के लिए कामना करते नजर आ रहे थे। चैत्र चौदस मेले के आखिरी दिन हिंदू सिख एकता का दृश्य हजारों साल पुरानी परंपरा को बयां कर रहा था। रोचक पहलू यह है कि राजस्थान-हिमाचल ओर पंजाब से आने वाले कुछ परिवार एक साल इस मेले के आने का इंतजार करते हैं। इस मेले के जरिए ही इन परिवारों में दोस्ताना संबंध स्थापित हुए। कई परिवारों ने तो भाई चारा तक कायम कर लिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे इस चैत्र चौदस मेले में पितरों की आत्मिक शांति के लिए आते है।
उपमंडल अधिकारी नागरिक अनिल कुमार दून ने कहा कि विश्व प्रसिद्घ चैत्र चौदस मेले में विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे, इन श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इस मेले में किसी भी श्रद्धालुओं को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से परेशानी नहीं आने दी गई। इन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की तरफ से करीब अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था। चैत्र चौदस मेले में कई जगहों पर नाकाबंदी की गई थी और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। महिला घाट पर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और पुलिस कर्मचारी और अधिकारी मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे। यह मेला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सम्पन्न हुआ, इसके लिए उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार भी व्यक्त किया है।
क्या है हिंदू-सिख एकता का रहस्य।
पिहोवा में सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी, छठी पातशाही गुरु हरगोबिंद, नौवीं पातशाही गुरू तेग बहादुर व 10वीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस पवित्र शहर में आए। इस प्रकार भगवान शिव शंकर, भगवान श्री कृष्ण सहित अनेक देवी देवताओं ने इस धर्म नगरी मे आए थे। इसलिए चैत्र चौदस मेले पर दोनों समुदाय के लोग श्रद्धा भाव से आते हैं।
हर गली मोहल्ले में लगे भंडारे।
विभिन्न संस्थाओं ने शहर की हर गली ओर मोहल्ले में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तौर पर लंगर लगाए गए थे। श्रद्धालुओं को वितरित किए जा रहे अटूट लंगर को देखकर ऐसा लग रहा था मानो शहर का हर नागरिक श्रद्धालुओं की सेवा में लगा हुआ है। इससे श्रद्धालुओं को यह संदेश भी मिल रहा है कि इस शहर में जाति धर्म ओर भेदभाव का नाम ओर निशान नहीं है। सभी लोग एक छत के नीचे रहकर सेवा करने में जुटे हुए हैं।
श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीदारी।
देश के कोने कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने सरस्वती तीर्थ के आस पास दुकानों पर जमकर खरीदारी की। तहसील रोड, मेन बाजार, सरस्वती चौक, गुरुद्वारा रोड आदि जगहों पर आस पास के क्षेत्रों से आए दुकानदारों ने बच्चों के लिए प्लास्टिक, लकड़ी ओर लोहे से बनाए गए आकर्षक खिलौने रखे गए थे। हर दुकान पर खिलौने खरीदने ओर देखने वालों की भीड़ देख जा सकती थी।
सूचना प्रसारण केन्द्र ने अपनो से बिछुड़ों को मिलवाने का किया काम।
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की तरफ से चैत्र चौदस मेले को लेकर सूचना प्रसारण केन्द्र स्थापित किया गया था। इस सूचना प्रसारण केन्द्र पर विभाग के कर्मचारियों, जिनमें विजय कुमार, जगदीश चंद्र, राजकुमार शर्मा, सुमन प्रकाश, शीश राम अपने से बिछुड़ों श्रद्घालुओं को मिलवाने का काम किया और श्रद्धालुओं के खोए हुए समान को वापिस लौटाने का काम किया।

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