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आज प्रत्येक क्षेत्र सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारितः प्रो. वीरेन्द्र पाल

केयू सांख्यिकी विभाग की साप्ताहिक कार्यशाला का हुआ समापन।

थानेसर कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 27 फरवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में सांख्यिकी एवं परिचालन अनुसंधान विभाग द्वारा “डेटा एनालिटिक टेक्नीक्स यूजिंग एसपीएसएस एवं आर” विषय पर 23 से 27 फरवरी, 2026 तक आयोजित एक सप्ताह की कार्यशाला का समापन विभाग के पी. सी. महालनोबिस सभागार में वेलेडिक्ट्री समारोह के साथ संपन्न हुआ। यह कार्यशाला कौशल विकास केंद्र के सहयोग से आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि आज का युग डेटा-आधारित निर्णयों का युग है और प्रत्येक क्षेत्र चाहे वह शिक्षा हो, प्रशासन हो या उद्योग सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रो. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करती हैं, बल्कि प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, तार्किक सोच एवं समस्या- समाधान क्षमता का विकास भी करती हैं। उन्होंने विभाग की सराहना करते हुए कहा कि सांख्यिकी जैसे विषय का महत्व भविष्य में और अधिक बढ़ेगा, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग एवं बिग डेटा के क्षेत्र में। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान को अपने शोध एवं व्यावसायिक जीवन में प्रभावी रूप से लागू करें।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो. संगीता अरोड़ा विभाग सांख्यिकी, पंजाब यूनिवर्सिटी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर में दक्षता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को निरंतर अभ्यास, शोध की नैतिकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी।
समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के आगमन एवं पुष्प स्वागत के साथ हुआ। कार्यशाला के संयोजक प्रो. एम. एस. कादयान ने स्वागत करते हुए पांच दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में कुल 88 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा उन्हें एसपीएसएस एवं आर सॉफ्टवेयर के माध्यम से डेटा प्रबंधन, परिकल्पना परीक्षण, प्रतिगमन विश्लेषण, बहुविवरणी तकनीकों एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते कहा कि विभाग सदैव शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं कौशल विकास के प्रति समर्पित रहा है। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों की वर्तमान शोध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई थी, ताकि उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कौशल विकास केंद्र के सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया और आयोजन समिति, संसाधन व्यक्तियों तथा तकनीकी स्टाफ के योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर प्रो. परमेश कुमार, प्रो. दीपक बब्बर, डॉ. गुरचरण, डॉ. जोरावर बूरा तथा डॉ. विपिन बाला सहित अन्य संकाय सदस्यगण सम्मिलित रहे।

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